गाजियाबाद से सामने आई यह घटना पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करती है। तीन नाबालिग बहनों का मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया, पहचान के भ्रम और बच्चों पर पड़ने वाले गहरे प्रभावों की गंभीर चेतावनी भी है। जांच में सामने आया कि बहनें लंबे समय से कोरियन कंटेंट, भाषा और संस्कृति से गहराई से जुड़ गई थीं और धीरे-धीरे खुद को उसी पहचान से जोड़ने लगीं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन वीडियो प्लेटफॉर्म उनकी रोज़मर्रा की दुनिया का बड़ा हिस्सा बन चुके थे।