मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक ऐसा मंदिर है जो साल में एक बार नागपंचमी पर ही खुलता है। ये मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के सबसे ऊपरी तल पर है। इसे नागचंद्रेश्वर के नाम से जाता है। इस बार 17 अगस्त को नागपंचमी के मौके पर यहां लाखों भक्त दर्शन करेंगे।
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उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के सबसे ऊपरी तल पर भगवान नागचंद्रेश्वर का मंदिर स्थित है। ये साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी पर ही 24 घंटे के लिए खुलता है।
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प्राचीन मान्यता है कि महाकाल वन में इसी स्थान पर कर्कोटक नाग ने तपस्या की थी। तब भगवान शिव ने उसे यहीं रहने का वरदान दिया था।
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नाग पंचमी के मौके पर हर साल महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से नागचंद्रेश्वर मंदिर में विशेष त्रिकाल पूजन होता है। ये पूजन साल में सिर्फ एक बार किया जाता है।
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भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा बहुत ही अद्भुत है। इस प्रतिमा में भगवान शिव देवी पार्वती के साथ शेषनाग पर विराजित हैं। ऐसी प्रतिमा अन्य कहीं देखने को नहीं मिलती।
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कहते हैं कि भगवान नागचंद्रेश्वर की ये अद्भुत प्रतिमा नेपाल से सिंधिया राजवंश द्वारा यहां स्थापित की गई थी।
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नागपंचमी के दिन लाखों भक्त भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। रात 12 पूजा के बाद भक्तों के दर्शन का क्रम शुरू होता है जो अगली रात 12 बजे तक चलता है।
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नागपंचमी के मौके पर साल में एक दिन खुलने वाला ये मंदिर अपने आप में अनूठ है। यही कारण है कि एक ही दिन में यहां लाखों भक्त दर्शन करने आते हैं।
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इस बार नागपंचमी का पर्व 17 अगस्त, सोमवार को मनाया जा रहा है। सावन सोमवार होने से इसका महत्व और भी अधिक हो गया है।
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उज्जैन का महाकाल मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में तीसरे स्थान पर है। ये मंदिर तीन मंजिला है। सबसे ऊपर नागंचंद्रेश्वर, उनके नीचे ओमकारेश्वर और गर्भग्रह में महाकालेश्वर विराजमान हैं।
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सावन में प्रत्येक सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है। 17 अगस्त को सोमवार होने से सावन की तीसरी सवारी भी निकाली जाएगी।
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