Published : Aug 03, 2026, 08:45 AM ISTUpdated : Aug 03, 2026, 08:57 AM IST
इस बार 3 अगस्त को सावन 2026 का पहला सोमवार है। इस मौके पर उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। पहले सोमवार को बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार भी किया गया, जिसे देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए।
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उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर का मंदिर स्थित है। ये 12 ज्योतिर्लिंगों में तीसरे स्थान पर आता है। यहां सावन में भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
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12 ज्योतिर्लिंगों में से एक मात्र महाकालेश्वर ही दक्षिण मुखी है। दक्षिण दिशा के स्वामी यमराज यानी काल हैं और काल के स्वामी होने के कारण इन्हें महाकाल कहा जाता है।
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महाकाल मंदिर में रोज सुबह होने वाली भस्मारती विश्व प्रसिद्ध है। दूर-दूर से भक्त यहां भस्मारती के दर्शन करने आते हैं।
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मान्यता है कि पहले के समय में मुर्दे की भस्म से भगवान महाकाल की भस्मारती की जाती थी लेकिन बाद में ये परंपरा बदल दी गई।
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वर्तमान में गाय के गोबर से बने उपलों से विशेष भस्म तैयार की जाती है। इसी से रोज बाबा महाकाल की भस्म आरती की जाती है।
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धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा के लिए उज्जैन में प्रकट हुए थे और ज्योतिर्लिंग रूप में यहीं स्थापित हो गए।
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महाकाल मंदिर के सबसे ऊपरी शिखर पर नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है जो साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी पर ही 24 घंटे के लिए खुलता है।
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ऐसी मान्यता है कि तक्षक नाग ने यहां शिवजी की घोर तपस्या की थी और आज भी वह महाकाल मंदिर में गुप्त रूप से निवास करता है।
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महाकाल मंदिर के गर्भ गृह की छत पर चांदी से बना रुद्र यंत्र स्थापित है, जिसके चलते इस मंदिर की पॉजिटिव एनर्जी और अधिक हो जाती है।
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उज्जैन में सावन के प्रत्येक सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी निकलती है, जिसे देखने के लिए लाखों भक्त यहां आते हैं।
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