Ahoi Ashtami 2026: 1 या 2 नवंबर, कब करें अहोई अष्टमी व्रत? जानें पूजा विधि, कथा और शुभ मुहूर्त

Published : Oct 31, 2026, 10:43 AM IST
Ahoi Ashtami 2026

सार

Ahoi Ashtami 2026 Shubh Muhurat: हिंदू धर्म में महिलाएं अपनी संतान की अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए कईं व्रत रखती हैं, अहोई अष्टमी भी इनमें से एक है। ये व्रत वैसे तो पूरे देश में मनाया जाता है लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश में इसकी खास मान्यता है।

Ahoi Ashtami 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना से किया जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और पूरे दिन उपवास रखती हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से यह व्रत करने पर संतान के जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं साल 2026 में अहोई अष्टमी कब मनाई जाएगी, पूजा का शुभ समय, विधि और व्रत की कथा…

कब है अहोई अष्टमी 2026?

पंचांग के अनुसार इस बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर, रविवार की दोपहर 02 बजकर 51 मिनिट से शुरू होगी जो 02 नवंबर, सोमवार की दोपहर 01 बजकर 10 मिनिट तक रहेगी। चूंकि अहोई अष्टमी की पूजा शाम को की जाती है और ये स्थिति 1 नवंबर को बन रही है, इसलिए इसी दिन अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।

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अहोई अष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त

1 नवंबर, रविवार को अहोई अष्टमी पूजा का मुहूर्त शाम 05 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। यानी महिलाओं को पूजा के लिए 01 घण्टे 18 मिनट का समय मिलेगा। इस दिन तारों को देखने का समय शाम 6 बजे से है। गोवर्धन राधा कुण्ड का स्नान भी इसी दिन किया जाएगा।

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इस विधि से करें अहोई अष्टमी व्रत और पूजा

- अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद हाथ में जल और चावल लेकर संतान की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखने का संकल्प लें।
- पूजा के लिए घर की दीवार पर गेरू से अहोई माता का चित्र बनाएं। अगर ऐसा करना संभव न हो तो बाजार से अहोई माता की तस्वीर लाकर पूजा स्थल पर लगा सकते हैं।
- पूजा के दौरान अहोई माता को चुनरी, लाल चूड़ियां, मेहंदी और अन्य सुहाग की चीजें चढ़ाएं। इसके बाद रोली, अक्षत, अबीर और गुलाल से माता की पूजा करें।
- इस व्रत में साही यानी सेह और उसके बच्चों का भी विशेष महत्व माना जाता है। इनकी तस्वीर या प्रतीक के सामने रोली, चावल और दूध आदि से पूजा करें।
- इसके बाद अहोई माता की व्रत कथा सुनें। धार्मिक मान्यता के अनुसार कथा के बिना व्रत की पूजा अधूरी मानी जाती है।
- पूजा पूरी होने के बाद घर की बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद लें। व्रत का पारण करने से पहले कुछ भी खाने से बचें। जरूरत महसूस होने पर फल या दूध ले सकते हैं।

अहोई अष्टमी व्रत की कथा

एक नगर में चंपा और चमेली नाम की दो सहेलियां रहती थीं। दोनों की कोई संतान नहीं थी। पुत्र प्राप्ति की इच्छा से उन्होंने अहोई अष्टमी का व्रत किया। चंपा ने पूरी श्रद्धा से पूजा की, जबकि चमेली के मन में उतनी आस्था नहीं थी। अहोई माता उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हुईं और वरदान मांगने को कहा। चमेली ने पुत्र मांगा, लेकिन चंपा ने माता की इच्छा को ही अपना वरदान बताया। इसके बाद माता ने दोनों को कुछ दूर खेल रहे बच्चों में से अपनी पसंद का बच्चा चुनने को कहा। दोनों बच्चों के पास पहुंचीं तो वे डरकर रोने लगे। चंपा ने बच्चों को परेशान देखकर छोड़ दिया, लेकिन चमेली जबरदस्ती एक बच्चे को अपने साथ ले आई। यह देखकर अहोई माता प्रकट हुईं। उन्होंने चंपा की दया और निस्वार्थ भावना से प्रसन्न होकर उसे पुत्रवती होने का आशीर्वाद दिया।


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