
Apra Ekadashi 2026 Kab Hai: धर्म ग्रंथों में कुल 16 तिथियां बताई गई हैं। इनमें से एकादशी तिथि को सबसे ज्यादा पवित्र माना गया है। एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। अधिक मास होने पर इनकी संख्या 26 हो जाती है। इनमें से ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अचला और अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार अपरा एकादशी का व्रत मई 2026 में किया जाएगा। आगे जानिए अचला एकादशी की सही डेट, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त आदि की जानकारी…
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पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 मई, मंगलवार की दोपहर लगभग 02 बजकर 52 मिनिट से होगी जो 13 मई, बुधवार की दोपहर 01 बजकर 30 मिनिट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 13 मई, बुधवार को होगा, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा।
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- सुबह 05:50 से 07:28 तक
- सुबह 07:28 से 09:06 तक
- सुबह 10:45 से दोपहर 12:23 तक
- दोपहर 03:39 से शाम 05:17 तक
- शाम 05:17 से 06:55 तक
अपरा एकादशी व्रत का पारण 14 मई 2026, गुरुवार को किया जाएगा। पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 31 मिनिट से 8 बजकर 14 मिनिट तक रहेगा। श्रद्धालु इस दौरान विधि-विधान से पारण कर अपना अपना पूरा कर सकते हैं।
- 13 मई, गुरुवार की सुबह स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की सामग्री एक स्थान पर एकत्रित कर लें।
- पूजा के लिए तय स्थान की साफ-सफाई कर गंगा जल छिड़कें। शुभ मुहूर्त में पूजा स्थान पर लकड़ी का पटिया रखकर इस पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
- सबसे पहले भगवान की प्रतिमा को तिलक लगाएं और हार पहनाएं। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक लगाएं। वस्त्र के रूप में भगवान को रक्षा सूत्र यानी पूजा का धागा अर्पित करें।
- इसके बाद कुंकुम, चावल, रोली, अबीर, गुलाल, फूल आदि चीजें भी भगवान को अर्पित करें। पूजा करते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप भी मन में करते रहें।
- भगवान को भोग लगाएं, इसमें तुलसी के पत्ते जरूर रखें। फिर आरती उतारें। रात को सोएं नहीं, भजन-कीर्तन करें। अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और दक्षिणा देकर पारणा करें।
- पारण के बाद प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करें और भोजन करें। इस तरह अपरा एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहेगी और हर तरह का सुख भी जीवन में मिलता है।
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओम जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओम जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ओम जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ओम जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ओम जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ओम जय जगदीश हरे।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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