Sankashti Chaturthi 2026: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत 6 मार्च को, जानें पूजा विधि, मंत्र-मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

Published : Mar 06, 2026, 07:58 AM IST
Sankashti Chaturthi 2026

सार

Sankashti Chaturthi March 2026: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस चतुर्थी व्रत का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस बार भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत 6 मार्च 2026 को किया जाएगा।

Kab Kare Bhalchandra Chaturthi Vrat 2026: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि बहुत ही खास होती है। इसे भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस दिन भगवान श्रीगणेश के भालचंद्र स्वरूप की पूजा होती है यानी जिस रूप में भगवान श्रीगणेश के मस्तक पर चंद्रमा विराजित रहता है। इस बार भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत 6 मार्च, शुक्रवार को किया जाएगा। इस चतुर्थी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। आगे जानिए भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की डेट, पूजा विधि, शुभ योग, मुहूर्त आदि की जानकारी…

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भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी चंद्रोदय का समय

चतुर्थी व्रत में भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। 6 मार्च, शुक्रवार को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत पर भगवान श्रीगणेश की पूजा चंद्रोदय से पहले पहले कर लें और जब चंद्रमा उदय हो जाए तो जल से अर्ध्य देकर इसकी भी पूजा करें। 6 मार्च को चंद्रोदय रात को लगभग 09 बजकर 15 मिनिट पर होगा।

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भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत-पूजा विधि

- 6 मार्च, शुक्रवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें।
- चंद्रोदय से पहले शुभ मुहूर्त से श्रीगणेश की पूजा करें। इसके लिए घर में लकड़ी के बाजोट पर गणेश प्रतिमा स्थापित करें।
- श्रीगणेश की प्रतिमा पर कुमकुम से तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद एक-एक करके जनेऊ, अबीर, गुलाल, रोली, दूर्वा, चावल, कुमकुम, वस्त्र, जनेऊ, पान, नारियल आदि चीजें भी चढ़ाएं।
- पूजा करते समय ऊं गं गणपतये नम: का जाप मन ही मन में करते रहें। भगवान को अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं।
- पूजा करने के बाद भगवान की आरती करें। रात को चंद्रमा के उदय होने पर जल से अर्ध्य दें और फूल-चावल भी चढ़ाएं।
- इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस तरह भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

गणेशजी की आरती लिरिक्स हिंदी में

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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