
Chaitra Navratri 2026 Devi Brahmacharini Puja Vidhi: चैत्र नवरात्रि 19 मार्च, गुरुवार से शुरू हो चुकी है। 20 मार्च को इस नवरात्रि की द्वितिया तिथि रहेगी। इस तिथि पर देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है। देवी ब्रह्मचारिणी तपस्या की देवी हैं। देवी दुर्गा का ये स्वरूप बहुत ही शांत है। ब्रह्मा की पुत्री होने के कारण ही देवी का ये नाम पड़ा। आगे जानिए देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र और आरती सहित पूरी डिटेल…
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सुबह 11:04 से दोपहर 12:34 तक
दोपहर 12:10 से 12:58 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:34 से 02:04 तक
दोपहर 02:04 से 03:34 तक
शाम 06:33 से 08:03 तक
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- 20 मार्च, शुक्रवार को शुभ मुहूर्त में घर में किसी साफ स्थान पर देवी ब्रह्मचारिणी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- देवी ब्रह्मचारिणी को कुमकुम का तिलक लगाएं, फूलों का हार पहनाएं और गाय शुद्ध घी का दीपक लगाएं।
- अबील, गुलाल, रोली, हल्दी, जनेऊ, फल, नारियल, सुपारी आदि चीजें एक-एक रके देवी को अर्पित करते रहें।
- देवी ब्रह्मचारिणी को गन्ने का भोग लगाएं। अगर गन्ना न हो तो गुड़ या शक्कर का भोग भी आप लगा सकते हैं।
- इसके बाद देवी ब्रह्मचारिणी की आरती करें। संभव हो तो नीचे लिखे मंत्र का जाप 108 बार करें-
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी।
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