Chaitra Navratri 2026 Kab Se Hai: चैत्र नवरात्रि कब से, पहले दिन क्यों करते हैं कलश स्थापना?

Published : Mar 14, 2026, 11:09 AM IST
Chaitra Navratri 2026 Kab Se Hai

सार

Chaitra Navratri 2026: हिंदू नववर्ष विक्रम संवत की शुरूआत नवरात्रि से होती है चूंकि ये नवरात्रि चैत्र मास में होती है, इसलिए इसे चैत्र नवरात्रि कहते हैं। इसे बड़ी नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इस बार ये नवरात्रि मार्च 2026 में मनाई जाएगी।

Chaitra Navratri 2026 Start Date: धर्म ग्रंथों के अनुसार एक साल में 4 बार नवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इनमें से चैत्र मास में आने वाली नवरात्रि बहुत खास होती है क्योंकि इस नवरात्रि के पहले दिन से ही हिंदू नव‌वर्ष विक्रम संवत की शुरूआत होती है। इसे बड़ी नवरात्रि भी कहा जाता है। धर्म ग्रंथों में इस नवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार चैत्र नवरात्रि का पर्व मार्च 2026 में मनाया जाएगा। जानें इस बार चैत्र नवरात्रि कब से शुरू होगी और इसके पहले दिन कलश स्थापना क्यों की जाती है…

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कब से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि 2026?

पंचांग के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरूआत 19 मार्च, गुरुवार से होगी और इसका समापन 27 मार्च, शुक्रवार को होगा। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन गुड़ी पड़वा, उगादि आदि उत्सव भी मनाए जाएंगे और इसी दिन से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरूआत होगी। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी। 9 दिनों तक देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा का विधान है। चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन 27 मार्च को श्रीराम नवमी उत्सव मनाया जाएगा।

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चैत्र नवरात्रि में क्यों करते हैं कलश स्थापना?

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना जरूरी की जाती है। इसके बिना नवरात्रि पर्व शुरू नहीं होता। ये कलश पूजा स्थल पर ही रखा जाता है। चैत्र नवरात्रि में जब कलश स्थापना की जाती है तो इसमें जो जल भरा जाता है, उसमें देवताओं का आवाहन किया जाता है, जिसके चलते इस कलश का जल बहुत ही पवित्र हो जाता है। इस कलश में हिंदू धर्म में पवित्र मानी जाने वाली अनेक चीजें डाली जाती हैं।

कलश में वास करते हैं सभी देवता

ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के पहले दिन जब कलश स्थापना की जाती है तो इस कलश के जल में सभी देवी-देवताओं का आवाहन किया जाता है। जिससे कि चैत्र नवरात्रि का पर्व बिना किसी बाधा के पूरे हो जाएं और सभी के जीवन में सुख-शांति बनी रहें। समुद्र मंथन के दौरान अनेक रत्न निकले थे। सबसे अंत में भगवान धन्वन्तरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। यही कारण है हिंदू धर्म में कलश को बहुत पवित्र माना जाता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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