
What Not To Do On Devshayani Ekadashi: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस बार ये एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और यहीं से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इसलिए इस एकादशी का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस एकादशी पर व्रती (व्रत करने वाले) को कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए नहीं तो पूजा का पूरा फल नहीं मिलता। आगे जानिए देवशयनी एकादशी पर कौन-से 5 काम न करें…
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व्रत का संबंध सिर्फ भोजन से ही नहीं होता बल्कि मन से भी होता है। इसलिए व्रत करने वाले को कोई भी गलत विचार मन में नहीं लाना चाहिए। न किसी के बारे में बुरा सोचना चाहिए। भोजन से संबंधित विचार करने से भी मन में विकार आ सकता है। इसलिए देवशयनी एकादशी पर भगवान का ध्यान करें।
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व्रत के दौरान क्रोध भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से भी अपराध लगता है। क्रोध में आकर व्यक्ति किसी को भी भला-बुरा बोल देता है, इसलिए भूलकर भी किसी पर क्रोध न करें। ऐसा करने से भी व्रत के नियम भंग होते हैं। व्रत के दौरान क्रोध पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी माना गया है।
व्रत पूर्ण होने पर स्वयं भोजन करने से पहले भगवान को भोग लगाएं और संभव हो तो जरूरतमंदों को भोजन का दान भी करें। इसके बाद ही स्वयं भोजन करें। ऐसा करने से आपको व्रत का पूरा फल मिलेगा और आपके जीवन में सुख-समृद्धि व शांति बनी रहेगी।
व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन सबसे ज्यादा जरूरी माना गया है। गलती से भी व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य टूटना नहीं चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि ब्रह्मचर्य का पालन सिर्फ शरीर ही नहीं बल्कि मन से भी करें, तभी व्रत-पूजा का पूरा फल मिलता है।
व्रत के दौरान किसी के साथ भी छल-कपट न करें नहीं तो व्रत टूट सकता है। छल-कपट से अर्थ है किसी के खिलाफ षड़यंत्र न करें, किसी के हक का पैसा न लूटें। ऐसा करने से भी व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।
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