पंडाल के गणपति विसर्जन की तैयारी कैसे करें? जानें पूजा से लेकर विदाई तक की पूरी लिस्ट

Published : Sep 22, 2026, 06:44 PM IST
Ganpati Visarjan from the Pandal

सार

Ganpati Visarjan Preparation: पंडाल में गणपति विसर्जन से पहले करें अंतिम पूजा, भोग, आरती और उत्तर पूजा। जानें बप्पा की विदाई से जुड़ी धार्मिक परंपराएं और जरूरी तैयारियां।

गणेश उत्सव के दौरान पंडालों में भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा का विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन यानी 25 सितंबर को किया जाएगा। उत्सव के समापन पर गणपति बप्पा को श्रद्धा और भक्ति के साथ विदाई दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विसर्जन भगवान गणेश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अगले वर्ष फिर उनके आगमन की कामना करने का अवसर माना जाता है। पंडाल में विसर्जन से पहले पूजा से लेकर शोभायात्रा तक कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें। जानें पंडाल के गणपति विसर्जन पर क्या करते हैं।

अंतिम पूजा और आरती से करें शुरुआत

विसर्जन से पहले पंडाल में भगवान गणेश की अंतिम पूजा करें। बप्पा को दूर्वा, फूल, सिंदूर, चंदन और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर गणेश जी की आरती करें। इस दौरान सभी श्रद्धालु मिलकर गणपति बप्पा मोरया का जयकारा लगा सकते हैं।

बप्पा को लगाएं मोदक का भोग

भगवान गणेश को विसर्जन से पहले मोदक, लड्डू, फल और अन्य सात्विक पकवानों का भोग लगाएं। पूजा के बाद प्रसाद को पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच बांटें। धार्मिक मान्यता के अनुसार भोग लगाने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

उत्तर पूजा और क्षमा प्रार्थना करें

कई परंपराओं में विसर्जन से पहले गणपति जी की उत्तर पूजा की जाती है। इसमें दोबारा पूजा, आरती और नैवेद्य चढ़ाए जाते हैं। इस दौरान भक्त जाने-अनजाने हुई पूजा संबंधी भूलों के लिए भगवान गणेश से क्षमा मांग सकते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना कर सकते हैं।

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जयकारों के साथ निकालें बप्पा की यात्रा

पूजा पूरी होने के बाद बप्पा की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है। शोभायात्रा के दौरान भक्त गणपति भजन, आरती और जयकारे कर सकते हैं। ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ का जयकारा बप्पा की विदाई के दौरान विशेष रूप से लगाया जाता है। आप बप्पा के गानों पर डोल में नाच भी सकते हैं।

विसर्जन स्थल पर करें अंतिम आरती

विसर्जन स्थल पर पहुंचकर भगवान गणेश की अंतिम आरती करें। फूल अर्पित करके सभी भक्तों के सुख-शांति की कामना करें। इसके बाद श्रद्धा के साथ प्रतिमा का विसर्जन करें।

नोट: स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान पर ही पूजा सामग्री डालें। प्रतिमा विसर्जन के लिए भी निर्धारित कृत्रिम तालाब का ही इस्तेमाल करें।

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