Gayatri Jayanti 2026: कब है गायत्री जयंती? जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और महत्व

Published : Jun 23, 2026, 09:26 AM IST
Gayatri Jayanti 2026

सार

Gayatri Jayanti 2026 Date: हिंदू धर्म में अनेक देवियों के बारे में बताया गया है। वेदमाता गायत्री भी इनमें से एक है। इनकी पूजा से संसार का हर सुख पाया जा सकता है।

Gayatri Jayanti 2026 Kab Hai: हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर गायत्री जयंती का पर्व मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि पर वेदमाता गायत्री प्रकट हुई थीं। इस बार गायत्री जयंती का पर्व 24 जून, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन शिव नाम का शुभ योग दिन भर रहेगा, जिससे इस पर्व का महत्व और अधिक हो गया है। आगे जानिए कैसे करें देवी गायत्री की पूजा, इस दिन के शुभ मुहूर्त व अन्य खास बातें…

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गायत्री जयंती 2026 शुभ मुहूर्त

सुबह 07:27 से 09:08 तक
सुबह 10:48 से दोपहर 12:29 तक
दोपहर 03:50 से 05:31 तक
शाम 05:31 से 07:11 तक

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इस विधि से करें देवी गायत्री की पूजा (Gayatri Jayanti Puja Vidhi)

- 24 जून, बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करें।
- घर में लकड़ी की चौकी पर देवी गायत्री की तस्वीर स्थापित करें। कुमकुम से तिलक करें और फूलों की माला पहनाएं।
- शुद्ध घी का दीपक जलाएं। अबीर, गुलाल, फल, वस्त्र, रोली, फूल, पूजा की सुपारी आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाएं।
- देवी को फल व मिठाई का भोग लगाएं-आरती करें। पूजा के बाद नीचे लिखे मंत्र का जाप 5 माला करें। ये है गायत्री मंत्र-
भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्
- इस प्रकार गायत्री जयंती पर पूजा और मंत्र जाप करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

देवी गायत्री की आरती (Devi Gayatri Ki Aarti)

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता ।
सत् मार्ग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जगपालक कर्त्री ।
दु:ख शोक, भय, क्लेश कलश दारिद्र दैन्य हत्री ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
ब्रह्म रूपिणी, प्रणात पालिन जगत धातृ अम्बे ।
भव भयहारी, जन-हितकारी, सुखदा जगदम्बे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
भय हारिणी, भवतारिणी, अनघेअज आनन्द राशि ।
अविकारी, अखहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
कामधेनु सतचित आनन्द जय गंगा गीता ।
सविता की शाश्वती, शक्ति तुम सावित्री सीता ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
ऋग, यजु साम, अथर्व प्रणयनी, प्रणव महामहिमे ।
कुण्डलिनी सहस्त्र सुषुमन शोभा गुण गरिमे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
स्वाहा, स्वधा, शची ब्रह्माणी राधा रुद्राणी ।
जय सतरूपा, वाणी, विद्या, कमला कल्याणी ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
जननी हम हैं दीन-हीन, दु:ख-दरिद्र के घेरे ।
यदपि कुटिल, कपटी कपूत तउ बालक हैं तेरे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
स्नेहसनी करुणामय माता चरण शरण दीजै ।
विलख रहे हम शिशु सुत तेरे दया दृष्टि कीजै ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
काम, क्रोध, मद, लोभ, दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिये ।
शुद्ध बुद्धि निष्पाप हृदय मन को पवित्र करिये ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥
जयति जय गायत्री माता,
जयति जय गायत्री माता ।
सत् मार्ग पर हमें चलाओ,
जो है सुखदाता ॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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