Hariyali Teej 2026: 15 या 16 अगस्त, कब है हरियाली तीज, क्यों मनाते हैं? जानें पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त

Published : Aug 14, 2026, 09:47 AM IST
Hariyali Teej 2026

सार

Hariyali Teej 2026 Date: हरियाली तीज हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस बार ये पर्व अगस्त 2026 में मनाया जाएगा। इसका महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है।

Hariyali Teej 2026 Details: सावन मास में अनेक व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं, हरियाली तीज भी इनमें से एक है। ये महिला प्रधान व्रत हैं जिसमें देवी पार्वती के साथ महादेव की पूजा भी की जाती है। ये व्रत सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर इसे मधुश्रवा तीज के नाम से भी जाना जाता है। आगे जानिए 2026 में कब है हरियाली तीज, ये पर्व क्यों मनाते हैं, पूजा विधि, मंत्र और मुहूर्त की डिटेल…

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कब है हरियाली तीज 2026?

पंचांग के अनुसार, सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त, शुक्रवार की शाम 06 बजकर 47 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 15 अगस्त, शनिवार की शाम 05 बजकर 29 मिनिट तक रहेगी। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, चूंकि तृतीया तिथि का सूर्योदय 15 अगस्त को होगा, इसलिए इसी दिन हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा।

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क्यों मनाते हैं हरियाली तीज?

हरियाली तीज से जुड़ी कईं मान्यताएं हैं। पुराणों के अनुसार देवी पार्वती ने महादेव को पति रूप में पाने के लिए कईं सालों तक घोर तपस्या की। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने देवी पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। मान्यता है कि उस दिन सावन शुक्ल तृतीया तिथि थी। तभी से इस तिथि पर हरियाली तीज का पर्व मनाया जा रहा है।

हरियाली तीज 2026 पूजा मुहूर्त

सुबह 07:43 से 09:19 तक
दोपहर 12:05 से 12:56 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:31 से 02:07 तक
दोपहर 03:43 से शाम 05:19 तक

हरियाली तीज व्रत-पूजा विधि

- 15 अगस्त, शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। पूजा के लिए घर के किसी शांत और पवित्र स्थान का चयन करें।
- एक लकड़ी के पटिए या चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।- शिव-पार्वती का कुंकुम और चंदन से तिलक करें।
- इसके बाद फूलों की माला अर्पित करें। पूजा स्थल पर शुद्ध घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें। अबीर, गुलाल, रोली, अक्षत और सुगंधित पुष्प चढ़ाएं।
- महादेव को बिल्व पत्र, धतूरा और आंकड़े के फूल चढ़ाएं। भगवान शिव को सफेद वस्त्र और माता पार्वती को सुहाग की सामग्री भेंट करें।
- पूजा करते समय ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। मौसमी फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य भगवान को अर्पित करें और शिव-पार्वती की आरती करें।
- सभी परिवारजनों को प्रसाद वितरित करें। मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि बनी रहती है।

पार्वती माता की आरती

ऊं जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता,
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता।
ऊं जय पार्वती माता॥
अरिकुल पद्म विनाशिनि जय सेवक त्राता,
जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता।
ऊं जय पार्वती माता॥
सिंह का वाहन साजे, कुण्डल है साथा,
देव बंधू जस गावत, नृत्य करत ताथा।
ऊं जय पार्वती माता॥
सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता,
हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता।
ऊं जय पार्वती माता॥
शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता,
सहस्त्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा।
ऊं जय पार्वती माता॥
सृष्टि रूप तुही जननी शिवसंग रंगराता,
नन्दी भृंगी बीन लाही है हाथन मदमाता।
ऊं जय पार्वती माता॥
देवन अरज करत हम कवचित को लाता,
गावत दे दे ताली, मन में रंगराता।
ऊं जय पार्वती माता॥
श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता,
सदा सुखी नित रहता, सुख सम्पत्ति पाता।
ऊं जय पार्वती माता॥
ऊं जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता,
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता।
ऊं जय पार्वती माता॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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