
Hartalika Teej Fast Rules: सुहाग की लंबी उम्र और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए रखा जाने वाला सबसे कठिन पर्व यानी हरितालिका तीज आज पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। महिलाएं इस दिन बिना अन्न और बिना जल (निर्जला) के 24 घंटे का कठोर नियम निभाती हैं। कई बार ऐसा भी देखा जाता है कि व्रत के दौरान अनजाने में मुंह में पानी की बूंद चली जाए, कोई गलती से घूंट भर ले या फिर लो बीपी, चक्कर और डिहाइड्रेशन के चलते तबीयत अचानक बिगड़ जाए। ऐसे में हर महिला के मन में सबसे बड़ा डर यही बैठ जाता है, 'क्या मेरा व्रत टूट गया? क्या मेरी पूजा बेकार हो गई?' अगर आपके या आपके परिवार में किसी के साथ ऐसी स्थिति बनी है, तो जानिए इस स्थिति में हमारे धर्मशास्त्र क्या कहते हैं...
शास्त्रों में हर नियम के पीछे 'भाव' यानी नीयत को सबसे ऊपर रखा गया है। अगर आपने जानबूझकर प्यास बुझाने के लिए पानी नहीं पिया है, जैसे कुल्ला करते समय या भूलवश पानी मुंह में चला गया, तो इसे शास्त्र में दोष नहीं माना जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार, जिस काम में मन का छल या लोभ शामिल न हो, उससे व्रत खंडित नहीं होता है।
अगर व्रत में गलती से मुंह में पानी चला जाए, तो मन में अपराधबोध (guilt) पालने के बजाय भगवान शिव और माता पार्वती के सामने हाथ जोड़कर अपनी भूल की क्षमा मांग लें। एक आचमन गंगाजल लेकर मन ही मन यह संकल्प दोहराएं, 'हे भोलेनाथ, मुझसे यह भूल अनजाने में हुई है, मेरी निष्ठा आपके चरणों में है, इस व्रत को पूर्ण मानें।'
शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम्
शास्त्रों का साफ नियम है कि शरीर ही सभी धर्मों को पूरा करने का मुख्य साधन है। अगर जान जोखिम में पड़ जाए, तो हठपूर्वक निर्जला व्रत खींचना सही नहीं माना गया है।
फलाहार या जल की छूट
गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं या गंभीर रूप से अस्वस्थ महिलाएं गंगाजल, नारियल पानी, या नींबू पानी ले सकती हैं। इसके लिए मानसिक रूप से भगवान से अनुमति मांगकर व्रत को 'फलाहारी' स्वरूप में जारी रखा जा सकता है।
दान का नियम
अगर किसी मजबूरी में व्रत बीच में छोड़ना पड़े, तो अगले दिन पारण के समय किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अन्न, वस्त्र या फल का अतिरिक्त दान कर उस कमी की भरपाई की जा सकती है।
इस साल हरितालिका तीज की तिथि और मुहूर्त को लेकर एक खास बात देखने को मिल रही है। सोमवार को भले ही तृतीया तिथि सुबह 07:28 बजे तक ही थी, लेकिन सूर्योदय तृतीया में होने के कारण उदयातिथि के नियम से पूरे दिन और रात तीज की पूजा मान्य रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, तीज की पूजा में तृतीया और चतुर्थी तिथि का मिलन सर्वोत्तम माना जाता है। आज तृतीया के साथ चतुर्थी का यह दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे 'गौरी-गणेश योग' और 'मातृ-पुत्र योग' का अतिशुभकारी फल मिलेगा। यानी माता पार्वती के साथ-साथ भगवान गणेश का आशीर्वाद भी दोगुना मिलेगा।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और लोक परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य सिर्फ सामान्य जानकारी देना है। किसी भी पूजा विधि, व्रत या धार्मिक अनुष्ठान के विशेष नियमों के लिए अपने कुल पुरोहित, ज्योतिषाचार्य या धर्मशास्त्र के विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
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