Kamada Ekadashi Kab Hai: कामदा एकादशी 2026 कब है? जानें सही डेट, पूजा विधि, मंत्र और मुहूर्त

Published : Mar 28, 2026, 09:48 AM IST

March Mein Ekadashi Kab Hai: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस बार कामदा एकादशी का व्रत मार्च 2026 में किया जाएगा। 

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जानें कामदा एकादशी 2026 से जुड़ी हर बात

कामदा एकादशी का व्रत कब है: धर्म ग्रंथों के अनुसार एक महीने में 2 बार एकादशी तिथि का संयोग बनता है। इस तरह साल में कुल 24 एकादशी होती है। इनमें से चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। पुराणों में भी इस एकादशी से जुड़ी कथाएं मिलती हैं। इस बार कामदा एकादशी का व्रत मार्च 2026 में किया जाएगा। जानिए क्या है कामदा एकादशी की सही डेट, पूजा विधि, मंत्र और महत्व…


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28 या 29 मार्च कब करें कामदा एकादशी व्रत?

पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 मार्च, शनिवार की सुबह 08 बजकर 46 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 29 मार्च, रविवार की सुबह 07 बजकर 46 मिनिट तक रहेगा। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 29 मार्च को होगा, इसलिए इसी दिन कामदा एकादशी का व्रत किया जाएगा।


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कामदा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

सुबह 07:57 से 09:28 तक
सुबह 09:28 से 11:00 तक
दोपहर 12:07 से 12:56 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 02:03 से 03:34 तक

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कामदा एकादशी व्रत-पूजा विधि

- कामदा एकादशी की सुबह सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। किसी से झूठ न बोलें, किसी पर क्रोध न करें, चुगली न करें, मन को शांत रखने का प्रयास करें।
- शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें। घर में किसी स्थान को अच्छी तरह साफ कर वहां गंगा जल छिड़कर उसे पवित्र कर लें।
- शुभ मुहूर्त में इस चौकी पर भगवान विष्णु की तस्वीर स्थापित करें। चित्र पर तिलक लगाएं, माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक लगाएं।
- इसके बाद भगवान विष्णु को पूजन की सामग्री जैसे अबीर, गुलाल, रोली, चावल, फूल, जनेऊ, वस्त्र पान आदि एक-एक करके चढ़ाएं।
- पूजा करते समय मन ही मन में ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते रहें। पूजा के बाद अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं।
- इसके बाद भगवान की विधि-विधान से आरती करें। रात्रि में सोएं नहीं बल्कि अपने परिवार व अन्य लोगों के साथ मिलकर भजन करें।
- द्वादशी तिथि (30 मार्च, सोमवार) की सुबह ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और दक्षिणा देकर विदा करें। इसके बाद ही स्वयं भोजन करें।

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भगवान विष्णु की आरती लिरिक्स हिंदी में

ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥
ओम जय जगदीश हरे...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ओम जय जगदीश हरे...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी।
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ओम जय जगदीश हरे...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ओम जय जगदीश हरे...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥
ओम जय जगदीश हरे...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ओम जय जगदीश हरे...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ओम जय जगदीश हरे...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥
ओम जय जगदीश हरे...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ओम जय जगदीश हरे...॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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