Narasimha Jayanti 2026: नृसिंह जयंती कब, 29 या 30 अप्रैल? जानें डेट, मुहूर्त-मंत्र, आरती सहित हर बात

Published : Apr 28, 2026, 09:50 AM IST
Narasimha Jayanti 2026

सार

Narasimha Jayanti 2026: भगवान विष्णु ने अधर्म के नाश के लिए अनेक अवतार लिए, नृसिंह भी इनमें से एक है। वैशाख मास में इनका जयंती पर्व मनाया जाता है। इस बार ये उत्सव अप्रैल 2026 में मनाया जाएगा।

Narasimha Jayanti 2026 Details: धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान नृसिंह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को प्रकट हुए थे। इसीलिए हर साल इस तिथि पर इनका जयंती उत्सव मनाया जाता है। इस अवतार में भगवान का स्वरूप आधे शेर का और आधे मनुष्य का था। भगवान विष्णु ने ये अवतार अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने और हिरण्यकश्यिपु का वध करने के लिए लिया था। आगे जानिए इस बार कब है नृसिंह जयंती और पूजा विधि, मंत्र, आरती सहित पूरी डिटेल…

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कब है नृसिंह चतुर्दशी 2026?

पंचांग के अनुसार, इस बार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल, बुध‌ार की रात 07 बजकर 51 मिनिट से शुरू होगी, जो 30 अप्रैल, गुरुवार की रात 09 बजकर 12 मिनिट तक रहेगी। विद्वानों का कहना है कि चूंकि भगवान नृसिंह का अवतार शाम को हुआ था, इसलिए ये पर्व 30 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जाएगा।

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नृसिंह जयंती 2026 शुभ मुहूर्त

30 अप्रैल, गुरुवार को नृसिंह जयंती पर पूजा का समय शाम 04 बजकर 17 मिनिट से 06 बजकर 56 मिनिट तक रहेगा। यानी पूजा के लिए आपको पूरे 02 घंटे 39 मिनट का समय मिलेगा। नृसिंह जयंती व्रत का पारणा अगले दिन यानी 1 मई, शुक्रवार को करें।

इस विधि से करें नृसिंह जयंती व्रत-पूजा

- 30 अप्रैल, गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- व्रती (व्रत करने वाला) दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। यानी किसी से विवाद न करें, चुगली न करें, कुछ भी खाए-पीएं नहीं आदि।
- शुभ मुहूर्त से पहले जिस स्थान पर पूजा करनी हो, वहां की साफ-सफाई कर लें। उस स्थान पर गंगा जल छिड़ककर पवित्र कर लें।
- यहां लकड़ी के पटिए पर एक कलश रखें। कलश पर चावल से भरी कटोरी रख इसके ऊपर भगवान नृसिंह-लक्ष्मी की प्रतिमा भी रखें।
- सबसे पहले भगवान नृसिंह-लक्ष्मी की प्रतिमा पर कुमकुम से तिलक करें, फूल अर्पित करें। वहीं पास ही शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं।
- अबीर, गुलाल, रोली, वस्त्र, नारियल आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाएं। नीचे लिखे मंत्र को बोलकर भोग लगाएं और इसके बाद आरती करें-
नैवेद्यं शर्करां चापि भक्ष्यभोज्यसमन्वितम्।
ददामि ते रमाकांत सर्वपापक्षयं कुरु।।
(पद्मपुराण, उत्तरखंड 170/62)
- पूजा करने के बाद नृसिंह भगवान की कथा भी जरूर सुनें। अगले दिन यानी 1 मई, शुक्रवार को व्रत का विधि-विधान से पारणा करें।
- इस तरह नृसिंह भगवान की पूजा करने से दुख और भय दूर होता है, घर में सुख-शांति रहती है, साथ ही मनोकामना भी पूरी होती है।

भगवान नृसिंह की आरती ( Lord Narasimha Aarti)

ऊं जय नरसिंह हरे,
प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,
स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,
जनका ताप हरे ॥
॥ ऊं जय नरसिंह हरे ॥
तुम हो दिन दयाला,
भक्तन हितकारी,
प्रभु भक्तन हितकारी ।
अद्भुत रूप बनाकर,
अद्भुत रूप बनाकर,
प्रकटे भय हारी ॥
॥ ऊं जय नरसिंह हरे ॥
सबके ह्रदय विदारण,
दुस्यु जियो मारी,
प्रभु दुस्यु जियो मारी ।
दास जान आपनायो,
दास जान आपनायो,
जनपर कृपा करी ॥
॥ ऊं जय नरसिंह हरे ॥
ब्रह्मा करत आरती,
माला पहिनावे,
प्रभु माला पहिनावे ।
शिवजी जय जय कहकर,
पुष्पन बरसावे ॥
॥ ऊं जय नरसिंह हरे ॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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