Sawan Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार कब है? जानें डेट, पूजा विधि-मंत्र और मुहूर्त

Manish Meharele   | SIGWIRE
Published : Jul 28, 2026, 02:47 PM IST
Sawan Somwar 2026

सार

Sawan First Somwar 2026 Date: वैसे तो पूरे सावन मास में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है लेकिन इस महीने में आने वाले सोमवार को और भी शुभ माना गया है।

Kab Hai Sawan Ka Pahla Somwar: भगवान शिव की भक्ति का महीना सावन इस बार 30 जुलाई से शुरू हो रहा है, जो 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। वैसे तो पूरा सावन मास ही शिव पूजा के लिए शुभ है लेकिन इस महीने में आने वाले प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सावन सोमवार को की गई शिव पूजा, उपाय, मंत्र जाप आदि का फल कई गुना होकर मिलता है। इस बार सावन में 4 सोमवार का संयोग बन रहा है। आगे जानिए कब है सावन का पहला सोमवार, पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त सहित पूरी डिटेल…

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कब है सावन 2026 का पहला सोमवार?

इस बार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। इस दिन श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पूरे दिन रहेगी, इस दिन मौना पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुकर्मा, धृति, गत और मातंग नाम के 4 शुभ योग रहेंगे, जिसके चलते इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।

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3 अगस्त 2026 शुभ मुहूर्त

- सुबह 09:17 से 10:55 तक
- दोपहर 12:07 से 12:59 तक (अभिजीत मुहूर्त)
- दोपहर 02:10 से 03:48 तक
- शाम 05:26 से 07:03 तक

सावन सोमवार पूजा विधि-मंत्र

- सावन सोमवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। ऊपर बताए गए किसी भी मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं।
- शुभ मुहूर्त शुरू होने पर पहले शिवलिंग का अभिषेक शुद्ध जल से करें, फिर गाय के दूध से और इसके बाद पुन: जल से अभिषेक करें।
- महादेव को चंदन लगाएं और फूल चढ़ाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। अबीर, गुलाल, चावल, जनेऊ, बिल्व पत्र, धतूरा और आंकड़ा चढ़ाएं।
- पूजा करते समय मन ही मन में ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। शिवजी को अपनी इच्छा के अनुसार फल, मिठाई का भोग लगाएं।
- इसके बाद विधि-विधान से आरती करें। प्रसाद भक्तों को बांट दें और संभव हो तो शिव चालीसा या शिव स्तुति आदि का पाठ करें।
- इस तरह सावन सोमवार पर शिवजी की पूजा करने से आपकी हर परेशानी दूर हो सकती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

शिवजी की आरती लिरिक्स हिंदी में

ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत, त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी, कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता, जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये, ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरती, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

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