नरक चौदस पर 13 या 14 कितने दीये जलाने चाहिए? जानें सही नियम

Published : Nov 07, 2026, 07:05 AM IST
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सार

Narak Chaturdashi Diyas: नरक चौदस पर 13 या 14 कितने दीये जलाने चाहिए? जानें यम दीपदान का महत्व, सही दिशा, चौमुखी दीपक जलाने की विधि और धार्मिक मान्यताएं।

दीवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चौदस को छोटी दीवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घर की साफ-सफाई करने, दीपक जलाने और यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चौदस की शाम को यम दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नरक चौदस पर कितने दीये जलाने चाहिए? यम दीपक घर के किस स्थान पर रखना चाहिए और इसे जलाने का सही तरीका क्या है? अगर आप भी इस साल छोटी दिवाली पर दीपदान करने की तैयारी कर रहे हैं, तो यहां जानिए इसकी पूरी विधि और इससे जुड़ी जरूरी बातें।

नरक चौदस पर कितने दीये जलाने चाहिए?

नरक चौदस के दिन परंपरा के अनुसार 13 दीपक जलाने की मान्यता प्रचलित है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में दीपकों की संख्या और उन्हें रखने की परंपरा अलग हो सकती है। इनमें यमराज के नाम से जलाया जाने वाला यम दीपक विशेष महत्व रखता है। इसके अलावा घर के मुख्य दरवाजे, पूजा स्थल, आंगन और घर के अन्य हिस्सों में भी दीपक जलाए जाते हैं। ध्यान रखें कि दीपकों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से दीपदान करना माना जाता है। अगर आप 13 दीपक नहीं जला सकते, तो अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार भी दीपदान कर सकते हैं।

क्या है यम दीपदान का महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी की शाम को यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों को लंबी आयु तथा अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। यम दीपदान को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना से भी जोड़ा जाता है। इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखने की परंपरा है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है। इसका उद्देश्य परिवार की खुशहाली, सुरक्षा और मंगल की कामना करना है।

यम दीपदान कब और कैसे करना चाहिए?

  • सबसे पहले मिट्टी का एक बड़ा चौमुखी दीपक लें।
  • इसमें सरसों का तेल या तिल का तेल डालें।
  • दीपक में चार रुई की बत्तियां लगाएं।
  • शाम को पूजा-पाठ के बाद इस दीपक को जलाएं।
  • इसे घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें।
  • दीपक जलाते समय यमराज से परिवार की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्रार्थना करें।

यम दीपदान करते समय कौन-सा मंत्र बोलें?

  • यम दीपदान मंत्र
  • मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह।
  • त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥
  • मंत्र का भावार्थ: सूर्यपुत्र यमराज इस दीपदान से प्रसन्न हों और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।

नरक चौदस पर दीये कहां-कहां जलाने चाहिए?

  • छोटी दिवाली पर घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाने की परंपरा है। आप इन जगहों पर दीये रख सकते हैं:
  • मुख्य दरवाजा: घर में शुभता और सकारात्मकता के स्वागत के लिए।
  • पूजा घर: भगवान के सामने दीपक जलाएं।
  • तुलसी का पौधा: तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है।
  • रसोईघर: मां अन्नपूर्णा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए।
  • आंगन और बालकनी: घर को रोशन करने के लिए।
  • घर की दक्षिण दिशा: यमराज के नाम से दीपदान करने के लिए।
  • दीपक रखते समय पर्दों, कपड़ों और ज्वलनशील चीजों से दूरी रखें। बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से भी दीये दूर रखें।

क्या नरक चौदस पर 13 या 14 दीये जलाने चाहिए?

इस सवाल को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम रहता है। दरअसल, अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में दीपकों की संख्या अलग बताई जाती है।

  • 13 दीये: कुछ परंपराओं में यमराज के निमित्त 13 दीपदान करने की मान्यता है।
  • 14 दीये: कई परिवारों में नरक चतुर्दशी पर 14 दीपक जलाने की परंपरा है।
  • एक चौमुखी दीपक: कुछ परंपराओं में यमराज के लिए विशेष रूप से चार बत्तियों वाला एक दीपक जलाया जाता है।

नरक चौदस पर दीपदान क्यों किया जाता है?

  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
  • वहीं यम दीपदान की परंपरा यमराज से जुड़ी है। मान्यता है कि इस दिन दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।

इस बार नरक चौदस पर इन बातों का रखें ध्यान

  • यम दीपक के लिए मिट्टी का चौमुखी दीपक इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • दीपक में सरसों या तिल का तेल डालें।
  • यम दीपक दक्षिण दिशा की ओर रखें।
  • दीपदान के समय परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
  • दीपक को ऐसी जगह रखें जहां आग लगने का खतरा न हो।
  • अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा करें।

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