
Parshuram Jayanti 2026 Kab Hai: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हर साल भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसे परशुराम जयंती भी कहते हैं। इस बार इस पर्व को लेकर मतभेद की स्थिति बन रही है। कुछ लोगों को मत है कि ये पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाना सही है तो कुछ 20 अप्रैल को परशुराम जयंती मनाने की बात कर रहे हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा से जानिए क्या है परशुराम जन्मोत्सव की सही डेट, पूजा विधि, मुहूर्त सहित पूरी डिटेल…
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ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 19 अप्रैल, रविवार की सुबह 10:49 से शुरू होगी जो 20 अप्रैल, सोमवार की सुबह 07:27 तक रहेगी। ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम की जन्म संध्या काल में हुआ था। तृतीया तिथि और संध्या काल का संयोग 19 अप्रैल को बन रहा है, इसलिए इसी दिन परशुराम जयंती उत्सव मनाया जाना श्रेष्ठ रहेगा।
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सुबह 07:41 से 09:16 तक
सुबह 09:16 से 10:51 तक
दोपहर 12:00 से 12:51 तक
दोपहर 02:00 से 03:35 तक
शाम 06:45 से रात 08:10 तक
19 अप्रैल, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल-चावल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में घर में किसी साफ स्थान पर भगवान परशुराम का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। भगवान के चित्र पर कुमकुम से तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। भगवान परशुराम को वस्त्र, जनेऊ, नारियल आदि चीजें एक-एक करके अर्पित करें। भोग लगाएं और आरती करें। व्रत करने वाले अनाज न खाएं। वे फलाहार कर सकते हैं। अगले दिन यानी 20 अप्रैल, की सुबह व्रत का पारण करें।
शौर्य तेज बल-बुद्धि धाम की॥
रेणुकासुत जमदग्नि के नंदन।
कौशलेश पूजित भृगु चंदन॥
अज अनंत प्रभु पूर्णकाम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥
नारायण अवतार सुहावन।
प्रगट भए महि भार उतारन॥
क्रोध कुंज भव भय विराम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥
परशु चाप शर कर में राजे।
ब्रह्मसूत्र गल माल विराजे॥
मंगलमय शुभ छबि ललाम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥
जननी प्रिय पितृ आज्ञाकारी।
दुष्ट दलन संतन हितकारी॥
ज्ञान पुंज जग कृत प्रणाम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥
परशुराम वल्लभ यश गावे।
श्रद्घायुत प्रभु पद शिर नावे॥
छहहिं चरण रति अष्ट याम की।
आरती कीजे श्री परशुराम की॥
Disclaimer
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