
Pitru Paksha Do and Don'ts: श्राद्ध पक्ष को पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस दौरान लोग पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य जैसे काम करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में कुछ कामों को करने से बचना चाहिए नहीं तो जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं। आगे जानिए ऐसे ही 10 कामों के बारे में जिन्हें श्राद्ध पक्ष में नहीं करना चाहिए…
ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान पितृ हमारे घरों में वास करते हैं। इसलिए इन 16 दिनों में भूलकर भी मांस-मदिरा का सेवन न करें और न ही घर में इन्हें लेकर आएं। ऐसा करने से पितृ नाराज हो सकते हैं।
ये भी पढ़ें-
Pitru Paksha Upay: पितरों को खुश करने के 10 उपाय बदल सकते हैं भाग्य, बुरी किस्मत से मिलेगा छुटकारा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। श्राद्ध पक्ष शुरू होने से या इसके बाद ये काम कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें-
Pitra Paksha 2026: पूर्वज की मृत्यु तारीख भूल गए हैं तो कब करें श्राद्ध? पितृ पक्ष की यह तिथि है सबसे खास
पितृ पक्ष के दौरान यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति भोजन या अन्य किसी इच्छा से हमारे घर आए तो उसे खाली हाथ न लौटाएं। अपने सामर्थ्य के अनुसार उसे कुछ न कुछ जरूर दें। भूलकर भी उसका अनादर न करें।
लहसुन-प्याज सहित कुछ चीजों को तामसिक माना जाता है। इनका उपयोग श्राद्ध के दौरान नहीं करना चाहिए। धार्मिक परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष में सात्विक भोजन करना बेहतर माना जाता है।
श्राद्ध पक्ष में स्त्री संग करने से भी बचना चाहिए, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है। ऐसा करने से उत्पन्न संतान परेशानियों का कारण बन सकती है।
धर्म ग्रंथों में पेड़े-पौधों को भी पितरों का ही रूप माना गया है, इसलिए श्राद्ध पक्ष के दौरान इन्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। ऐसा करने से भी पितरों को कष्ट होता है।
पुराणों की मानें तो श्राद्ध पक्ष में बॉडी मसाज या तेल की मालिश नहीं करवानी चाहिए। इन दिनों में पान खाने की भी मनाही है।
श्राद्ध से जुड़े अनेक नियम धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। इनमें से एक नियम ये भी है कि किसी दूसरे के घर पर श्राद्ध नहीं करना चाहिए। नदी, पर्वत, तीर्थ आदि पर श्राद्ध कर सकते हैं।
श्राद्ध करते समय आसान का भी विशेष महत्व है। विद्वानों की मानें तो लोहे के आसन पर बैठकर श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए। रेशमी, कंबल, लकड़ी, कुशा आदि के आसन श्रेष्ठ हैं।
रात को राक्षसी समय माना गया है, इसलिए इस समय श्राद्ध नहीं करना चाहिए। दोनों संध्याओं (सूर्योदय व सूर्यास्त) के समय भी श्राद्ध करने से बचना चाहिए।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।