24 अप्रैल को करें वरुथिनी एकादशी व्रत, जानें पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त सहित हर बात

Published : Apr 13, 2025, 10:11 AM ISTUpdated : Apr 24, 2025, 08:51 AM IST
varuthini ekadashi 2025

सार

Varuthini Ekadashi 2025: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहते हैं। इस बार वरुथिनी एकादशी का व्रत अप्रैल 2025 में किया जाएगा। इस एकादशी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। 

Varuthini Ekadashi 2025: धर्म ग्रंथों के अनुसार, एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। इनमें से वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहते हैं। पुराणों के अनुसार, इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से 10 हजार वर्षों की तपस्या के बराबर फल प्राप्त होता है, साथ ही सभी पापों का नाश भी हो जाता है। आगे जानिए कब करें वरुथिनी एकादशी व्रत, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और कथा सहित पूरी डिटेल…

कब करें वरुथिनी एकादशी व्रत 2025?

पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 अप्रैल, बुधवार की शाम 04 बजकर 43 मिनिट से शुरू होगी, जो 24 अप्रैल, गुरुवार की दोपहर 02 बजकर 32 मिनिट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 24 अप्रैल को होगा, इसलिए इस दिन वरुथिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस दिन ब्रह्म और इंद्र नाम के 2 शुभ योग भी रहेंगे, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। ये हैं पूजा के मुहूर्त…
- सुबह 10:49 से दोपहर 12:24 तक
- दोपहर 12:24 से 02:00 तक
- दोपहर 02:00 से 03:36 तक
- शाम 06:47 से रात 08:11 तक

वरुथिनी एकादशी व्रत-पूजा विधि

- वरुथिनी एकादशी के एक दिन पहले यानी 23 अप्रैल, बुधवार की रात सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- 24 अप्रैल, गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल-चावल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की तैयारी कर लें। मुहूर्त में भगवान विष्णु की प्रतिमा एक लकड़ी के बाजोट पर स्थापित करें।
- भगवान की प्रतिमा को कुमकुम से तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं।
- इसके बाद अबीर, गुलाल, फूल, रोली आदि चीजें चढ़ाएं। पूजा के दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते रहें।
- पूजा के बाद भगवान को भोग लगाएं और आरती करें। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें व एकादशी व्रत कथा सुनें।
- अगले दिन यानी 25 अप्रैल, शुक्रवार को व्रत का पारण करें।इस प्रकार वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है।

ये है वरुथिनी एकादशी व्रत की कथा

धर्म ग्रंथों के अनुसार, किसी समय मांधाता नाम के एक राजा थे। एक बार वे जंगल में तपस्या कर रहे थे, तभी वहां एक भालू आकर उनका पैर खाने लगा। अत्यंत कष्ट होने के बाद भी राजा मांधाता तपस्या करते रहे। जब भालू राजा को खींचकर जंगल में ले जाने लगा तो उन्होंने मन ही मन भगवान विष्णु स्मरण किया। भगवान विष्णु उसी समय वहां प्रकट हुए और राजा के प्राण बचाए। तब तक भालू राजा मांधाता को घायल कर चुका था। तब भगवान विष्णु ने उनसे वरुथिनी एकादशी का व्रत करने को कहा। राजा ने विधि-विधान से ये व्रत किया जिससे वे दोबारा स्वस्थ हो गए। इस व्रत के प्रभाव से राजा को स्वर्ग की प्राप्ति हुई।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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