Durga Mata Aarti Lyrics In Hindi: दुर्गा माता आरती लिरिक्स हिंदी में

Published : Sep 21, 2025, 03:44 PM IST
Durga Mata Aarti Lyrics In Hindi

सार

Durga Mata Aarti Lyrics In Hindi: हिंदू धर्म में जब भी देवी दुर्गा की पूजा की जाती है तो आखिर में आरती जरूर की जाती है। बिना आरती के पूजा पूरी नहीं होती। जानें कैसे करें मां दुर्गा की आरती जय अम्बे गौरी... और आरती करने की सही विधि।

Durga Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi: हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा पूजी जानी वाली देवी हैं मां दुर्गा। अन्य सभी देवियां मां दुर्गा का ही स्वरूप मानी जाती हैं। अनेक अवसरों पर देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि देवी दुर्गा की पूजा करने से हर तरह रोग, शोक और भय दूर हो जाता है। पूजा के बाद देवी दुर्गा की आरती करने की परंपरा भी है। आगे जानिए कैसे करें दुर्गा जी की आरती जय मां अम्बे गौरी... और आरती करने की सही विधि…

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कैसे उतारें मां दुर्गा की आरती?

- विद्वानों की मानें तो देवी मां की आरती कुल 14 बार घुमानी चाहिए। सबसे पहले 4 बार चरणों से, 2 बार नाभि से, 1 बार चेहरे पर से और 7 बार पूरे शरीर से।
- शास्त्रों में आरती की यही विधि बताई गई है। इस प्रकार विधि-विधान से यदि देवी की आरती की जाए तो उनकी कृपा हमारे ऊपर हमेशा बनी रहती है।
- इस तरह देवी दुर्गा की आरती करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहेगी, साथ ही जीवन में आने वाले संकट भी अपने आप ही टल जाएंगे।

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मां दुर्गा की आरती (Devi Durga Ki Aarti)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥1॥ जय अम्बे…
माँग सिंदुर विराजत टीको मृगमदको।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको ॥2॥ जय अम्बे.…
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
रक्त-पुष्प गल माला, कण्ठनपर साजै ॥3॥ जय अम्बे…
केहरी वाहन राजत, खड्ग खपर धारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहरी ॥4॥ जय अम्बे…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥5॥ जय अम्बे…
शुंभ निशुंभ विदारे, महिषासुर-धाती।
धूम्रविलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥6॥ जय अम्बे…
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणितबीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥7॥ जय अम्बे…
ब्रह्माणी, रूद्राणी तुम कमलारानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी ॥8॥ जय अम्बे…
चौसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा औ बाजत डमरू ॥9॥ जय अम्बे…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता सुख सम्पति करता ॥10॥ जय अम्बे…
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवाञ्छित फल पावत, सेवत नर-नारी ॥11॥ जय अम्बे…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
(श्री) मालकेतु में राजत कोटिरतन ज्योती ॥12॥ जय अम्बे…
(श्री) अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पति पावै ॥13॥ जय अम्बे…


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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