
Shani Pradosh Vrat Katha In Hindi: धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत जिस दिन किया जाता है, उसी के अनुसार उसका नाम हो जाता है जैसे इस बार 4 अक्टूबर, शनिवार को प्रदोष व्रत किया जाएगा। शनिवार को होने से ये शनि प्रदोष कहलाएगा। शनि प्रदोष से जुड़ी एक रोचक कथा भी है, जिससे सुनकर ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे जानिए शनि व्रत की रोचक कथा…
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प्राचीन समय में किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। उसका एक पुत्र था, जिसक नाम शुचिव्रत था। ब्राह्मण के घर में राजा का पुत्र भी रहता था, जो अपना राज्य हार चुका था, उसका नाम धर्म था। एक दिन ब्राह्मण की पत्नी शाण्डिल्य ऋषि से मिली और उन्हें अपनी दरिद्रता के बारे में बताया। शाण्डिल्य ऋषि ने उन सभी को प्रदोष व्रत करने को कहा।शाण्डिल्य ऋषि के कहने पर ब्राह्मण का पूरा परिवार प्रदोष व्रत करने लगा।
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एक दिन ब्राह्मण के पुत्र शुचिव्रत को रास्ते में से धन से भरा एक कलश मिला। ये बात उसने अपनी माता को बताई। माता समझ गई कि ये प्रदोष व्रत का ही फल है। कुछ दिनों बाद जब धर्म और शुचिव्रत कहीं जा रहे थे तो उन्होंने बहुत सी गंधर्व कन्याओं को देखा। राजा का पुत्र धर्म उनमें से एक गंधर्व कन्या पर मोहित हो गया।गंधर्व कन्या भी राजा के पुत्र पर मोहित हो गई। उस गंधर्व कन्या का नाम अंशुमति था।
राजपुत्र धर्म ने गंधर्व कन्या को अपने बारे में सच-सच बता दिया। गंधर्व कन्या ने एक मोती की माला धर्म के गले में पहना दी और वहां से चली गई। कुछ दिनों बाद राजपुत्र धर्म फिर उसी स्थान पर गया जहां उसे गंधर्व कन्या मिली थी। अंशुमति के साथ उसके पिता भी थे। गंधर्वराज ने अपनी पुत्री अंशुमति का विवाह राजपुत्र धर्म से करवा दिया और उसे उसका खोया राज्य दिलाने में भी सहायता की। इस तरह प्रदोष व्रत करने से गरीब ब्राह्मण का पूरा परिवार खुशी-खुशी रहने लगे।
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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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