Tulsi Vivah 2025: कब है तुलसी विवाह, जानें शुभ मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व

Published : Sep 22, 2025, 02:44 PM IST
Tulsi Vivah date and muhurat

सार

तुलसी विवाह 2025 कार्तिक शुक्ल द्वादशी, 2 नवंबर को मनाया जाएगा। यह पर्व देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम के दिव्य मिलन का प्रतीक है। तुलसी विवाह परिवार में सौभाग्य, समृद्धि और मानसिक शांति लाता है। 

Tulsi Vivah 2025: हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। यह देवउठनी एकादशी के अगले दिन मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं, जिससे संसार में शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इसी कारण से, हिंदू परिवारों में तुलसी विवाह का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

तुलसी विवाह 2025 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, 2025 में कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि 2 नवंबर को सुबह 7:31 बजे शुरू होगी और 3 नवंबर को सुबह 5:07 बजे समाप्त होगी। इसलिए, इस वर्ष तुलसी विवाह रविवार, 2 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन हर घर में विशेष पूजा, व्रत और विवाह संस्कार किए जाते हैं।

तुलसी विवाह का सार देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम के दिव्य मिलन का उत्सव है। सभी पारंपरिक विवाह अनुष्ठान, जैसे मंडप सजाना, कन्यादान और सात वचन लेना, पूरी रीति-रिवाजों के साथ, बिल्कुल असली विवाह की तरह ही संपन्न किए जाते हैं।

तुलसी विवाह का धार्मिक महत्व

शुभ कार्यों की शुरुआत

देवउठनी एकादशी के बाद, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, तो विवाह और गृहप्रवेश जैसे सभी शुभ कार्य आरंभ माने जाते हैं। तुलसी विवाह इन शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक है।

सौभाग्य प्राप्ति

ऐसा माना जाता है कि तुलसी विवाह करने वाले परिवार को सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत और विवाह से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।

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पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति

तुलसी विवाह करने से सभी पापों का नाश होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे मोक्ष और मन की शांति की प्राप्ति होती है।

तुलसी विवाह पूजन विधि

इस दिन घर की साफ-सफाई के बाद तुलसी के पौधे को किसी पवित्र स्थान पर स्थापित करें। फिर तुलसी माता का श्रृंगार करें। तुलसी को लाल वस्त्र पहनाएं, कुमकुम लगाएं और फूल, हल्दी और चूड़ियां चढ़ाएं। साथ ही, तुलसी के बाईं ओर शालिग्राम की स्थापना करें। तुलसी पर जल चढ़ाएं और सिंदूर, हल्दी, फूल और मिठाई चढ़ाएं। पूजा के दौरान, तुलसी को सोलह श्रृंगार से सजाएं। इसके बाद, आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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