Ekadashi Kab Ki Hai: कब करें पुत्रदा एकादशी व्रत 2026? नोट करें पारण का मुहूर्त, शुभ योग और महत्व

Published : Aug 22, 2026, 08:34 AM IST
Ekadashi Kab Ki Hai

सार

is mahine mein ekadashi kab ki hai: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैं। धर्म ग्रंथों में इसे पवित्रा एकादशी भी कहा गया है। इस बार पुत्रदा एकादशी का व्रत अगस्त 2026 में किया जाएगा।

ekadashi gyaras kab ki hai: हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। एक साल में कुल 24 एकादशी होती है। इन सभी का अलग-अलग नाम, महत्व, कथा के बारे में धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इनमें से श्रावण यानी सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पुत्रदा है। कुछ ग्रंथों में इसे पवित्रा भी कहा गया है। सावन में शिव पूजा के साथ भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व है। इसलिए ये एकादशी बहुत ही खास मानी गई है। जानें पुत्रदा एकादशी 2026 की सही डेट…

कब है पुत्रदा एकादशी 2026?

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, इस बार सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 22 अगस्त, शनिवार की रात 02 बजे से शुरू होगी, जो 24 अगस्त की सुबह 04:18 तक रहेगी। यानी 23 अगस्त को पूरे दिन एकादशी तिथि का संयोग बना रहेगा। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 23 अगस्त, रविवार को होगा, इसलिए इसी दिन पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाएगा।

पुत्रदा एकादशी 2026 पर कौन-से शुभ योग बनेंगे?

इस बार पुत्रदा एकादशी पर कईं शुभ योग बन रहे हैं जिसके चलते इस व्रत का महत्व और भी अधिक हो गया है। ज्योतिषियों के अनुसार 23 अगस्त, रविवार को सर्वार्थसिद्धि योग दिन भर रहेगा। इस योग में की गई पूजा, उपाय आदि सभी सिद्ध होते हैं यानी इनका शुभ फल मिलता है। इसके अलावा शुभ और प्रीति नाम के 2 अन्य योग भी इस दिन रहेंगे।

कब करें पुत्रदा एकादशी 2026 का पारण?

पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 24 अगस्त, सोमवार को किया जाएगा। इस दिन व्रत पारण के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 41 मिनिट से शाम 04 बजकर 16 मिनिट तक रहेगा। इस दौरान व्रत का पारण किया जा सकता है। पारण से पहले जरूरतमंदों को दान अवश्य दें। तभी व्रत का पूरा फल मिलता है, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है।

क्यों करते हैं पुत्रदा एकादशी व्रत?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो लोग योग्य संतान की इच्छा रखते हैं उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए। जिन दंपत्ति को विवाह के लंबे समय के बाद भी यदि संतान प्राप्ति न हो तो उनके लिए भी ये व्रत मनचाहा फल देने वाला माना गया है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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