Rama Ekadashi Vrat Katha: पत्नी के एकादशी व्रत से बदल गई पति की किस्मत, पढ़ें रमा एकादशी की ये कथा

Published : Nov 05, 2026, 06:30 AM IST
Rama Ekadashi Vrat Katha

सार

Rama Ekadashi 2026: इस बार रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। राजा शोभन को रमा एकादशी के व्रत के प्रभाव से एक सुंदर नगर प्राप्त हुआ था। जानिए राजा शोभन और चन्द्रभागा से जुड़ी इस व्रत की पूरी कथा।

Rama Ekadashi Vrat Katha In Hindi: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। इस साल रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर, गुरुवार को रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए खास माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि रमा एकादशी का व्रत करने से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है, जिसमें राजा शोभन, उनकी पत्नी चन्द्रभागा और उनके पुण्य का वर्णन मिलता है। आगे पढ़िए रमा एकादशी की पूरी व्रत कथा…

रमा एकादशी व्रत कथा हिंदी में

पौराणिक कथा के अनुसार, मुचुकुन्द नाम के एक राजा थे। वे भगवान विष्णु के भक्त और एकादशी व्रत का नियमित पालन करने वाले थे। उनके राज्य में भी सभी लोग इस व्रत को रखते थे। उनकी बेटी चन्द्रभागा का विवाह राजा चन्द्रसेन के बेटे शोभन से हुआ था।

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एक बार कार्तिक मास में शोभन अपनी पत्नी के घर आया। उसी दौरान रमा एकादशी का व्रत पड़ा। राजा ने पूरे राज्य में सभी को व्रत रखने का आदेश दिया। शोभन शारीरिक रूप से कमजोर था और उसे भूख-प्यास सहने की आदत नहीं थी। पत्नी ने उसे किसी दूसरे स्थान पर जाने की सलाह दी, लेकिन शोभन ने व्रत करने का फैसला किया।

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पूरे दिन भूखे-प्यासे रहने के कारण शोभन की हालत बिगड़ गई और अगले दिन सूर्योदय से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई। राजा ने उसका अंतिम संस्कार करवाया और बेटी चन्द्रभागा को सती होने से रोक दिया।

रमा एकादशी के व्रत के प्रभाव से शोभन को मन्दराचल पर्वत पर एक सुंदर और समृद्ध नगर प्राप्त हुआ। वहां वह राजा बनकर रहने लगा। कुछ समय बाद सोमशर्मा नाम के एक ब्राह्मण ने उसे देखा। शोभन ने बताया कि उसे यह नगर रमा एकादशी के व्रत के पुण्य से मिला है, लेकिन श्रद्धा के बिना व्रत करने के कारण यह नगर स्थायी नहीं है।

ब्राह्मण ने लौटकर यह बात चन्द्रभागा को बताई। तब चन्द्रभागा ने अपने वर्षों से किए जा रहे एकादशी व्रत का पुण्य पति को देने का संकल्प लिया। ब्राह्मण उसे वामदेव ऋषि के आश्रम ले गया। ऋषि ने मंत्रों से उसका अभिषेक किया। इसके बाद चन्द्रभागा अपने पति के पास पहुंची और अपने व्रत का पुण्य उसे अर्पित कर दिया।

न्द्रभागा के पुण्य से शोभन का नगर स्थायी हो गया और दोनों सुखपूर्वक रहने लगे। कथा के अनुसार, रमा एकादशी का व्रत करने और इसकी कथा सुनने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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