
Shani Amavasya 2026: अमावस्या तिथि को हिंदू धर्म में स्नान, दान, पितरों के तर्पण और पूजा-पाठ के लिए खास माना जाता है। इस बार आश्विन मास की अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाएगा। खास बात यह है कि इसी दिन सर्वपितृ अमावस्या यानी पितृ मोक्ष अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। जानिए शनिश्चरी अमावस्या की सही डेट, पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त व अन्य डिटेल…
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर 2026 की रात करीब 9:35 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर की रात करीब 9:19 बजे तक रहेगी। चूंकि 10 अक्टूबर को शनिवार है और इसी दिन दिनभर अमावस्या तिथि रहेगी, इसलिए शनिश्चरी अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। इसी दिन सर्वपितृ अमावस्या भी रहेगी और पितृ पक्ष का समापन होगा।
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- सुबह 07:52 से 09:19 तक
- सुबह 11:50 से दोपहर 12:37 तक
- दोपहर 12:13 से 01:40 तक
- दोपहर 03:08 से शाम 04:35 तक
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- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद अपने आस-पास किसी शनि मंदिर में जाएं।
- शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और सरसों के तेल से शनि देव की प्रतिमा का अभिषेक भी करें।
- शनिदेव को काला तिल, काला वस्त्र और अपराजिता के फूल अर्पित करें। मन ही मन हमें शनिदेव के मंत्र का जाप भी करें।
- संभव हो तो इस दिन व्रत रखें और शाम को एक बार फिर से शनिदेव की पूजा करके के बाद फलाहार कर सकते हैं।
- इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
शनिश्चरी अमावस्या पर ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें। इसके अलावा शनि चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें और आसन पर बैठकर ही ये उपाय करें।
शनिदेव की पूजा में काले तिल, उड़द की दाल की खिचड़ी का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। इसे बनाने में सरसो के तेल का उपयोग करें। शनिदेव को तिल से बनी चीजों का भोग भी लगा सकते हैं जैसे-रेवड़ी, गजक आदि।
1. पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
2. काले तिल और उड़द का दान करें।
3. शनिदेव के मंदिर जाकर दर्शन करें।
4. गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करें।
5. जरूरतमंदों को काले कंबल का दान करें।
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