Pitru Paksha Special: श्राद्ध का खाना सबसे पहले कौए को ही क्यों खिलाते हैं? जानें पितरों से जुड़ी धार्मिक मान्यता

Published : Sep 25, 2026, 12:51 PM IST
Pitru Paksha Special

सार

Pitru Paksha 2026: इस बार श्राद्ध पक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक रहेगा। श्राद्ध से जुड़े अनेक नियम हमारे धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। श्राद्ध का भोजन कौए को खिलाना भी इन जरूरी नियमों में से एक है।

Pitru Paksha Crow Religious Belief: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों को याद करने और उनका आशीर्वाद लेने का समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं। श्राद्ध में सबसे पहले भोजन का कुछ हिस्सा कौए को खिलाया जाता है। मान्यता के अनुसार- कौए को पितरों का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि श्राद्ध के दिन कौए के आने और भोजन ग्रहण करने को विशेष महत्व दिया जाता है।

कौए और पितरों का क्या संबंध है?

कौए को पितरों का संदेशवाहक माना गया है। जब श्राद्ध का भोजन कौए को दिया जाता है, तो वह प्रतीक रूप से पितरों तक पहुंचता है। मान्यता है कि कौए के रूप में पितर श्राद्ध का भोजन स्वीकार कर सकते हैं और परिवार को अपना आशीर्वाद देते हैं। इस वजह से श्राद्ध के भोजन में पहले कौए के लिए भोजन निकाला जाता है। इसे कई जगह 'काग ग्रास' भी कहा जाता है। 'काग' का अर्थ कौआ होता है।

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कौए को लेकर धार्मिक कहानी क्या है?

एक कथा के अनुसार- देवताओं के राजा इंद्र के पुत्र जयंत ने कौए का रूप धारण किया था। त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम वनवास के दौरान माता सीता और लक्ष्मण के साथ रह रहे थे, तब जयंत ने कौए का रूप लेकर माता सीता को परेशान किया था। भगवान श्रीराम ने जयंत को उसके अपराध का दंड दिया। बाद में जयंत ने भगवान श्रीराम से क्षमा मांगी। इस कथा को कौए के महत्व से जोड़कर देखा जाता है।

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कौआ भोजन कर ले तो क्या माना जाता है?

पितृ पक्ष में मान्यता है कि अगर कौआ श्राद्ध का भोजन ग्रहण कर ले, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। श्रद्धालु इसे इस रूप में देखते हैं कि पितरों ने उनका अर्पण स्वीकार कर लिया है। इसके बाद परिवार के लोग पितरों से सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलने की कामना करते हैं। श्राद्ध के भोजन का पहला हिस्सा कौए को खिलाने की परंपरा सिर्फ एक रीति नहीं, बल्कि पितरों के प्रति सम्मान और उन्हें याद करने का दिन होता है। श्रद्धा से किया गया श्राद्ध पितरों को संतुष्ट करता है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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