Annakut 2025: कब है अन्नकूट, इस दिन श्रीकृष्ण को क्यों लगाते हैं 56 भोग?

Published : Oct 21, 2025, 09:48 AM IST
Annakut 2025

सार

Annakut 2025: अन्नकूट उत्सव दिवाली के दूसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को 56 अलग-अलग तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है। ये परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है।

Annakoot 2025 Kab Hai: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि बहुत ही खास होती है क्योंकि इस दिन अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों में भी इस पर्व का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार ये पर्व दिवाली के अगले दिन नहीं बल्कि एक दिन छोड़कर यानी 22 अक्टूबर, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को 56 पकवानों का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। इस परंपरा से एक रोचक कथा जुड़ी है। आगे जानें क्यों मनाते हैं अन्नकूट उत्सव…

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क्यों मनाते हैं अन्नकूट उत्सव?

- प्रचलित कथा के अनुसार ‘द्वापरयुग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। इस दौरान उनका बचपन गोकुल गांव में बीता। यहां के लोग अच्छी बारिश के लिए इंद्रदेव की पूजा करते थे। श्रीकृष्ण ने सबको समझाया कि बारिश करना इंद्र का कर्तव्य है। अगर पूजा करनी ही है तो गोवर्धन पर्वत की करें क्योंकि उसी के द्वारा हमारी गायों का पोषण होता है।

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- गोकुल के लोगों ने श्रीकृष्ण के कहने पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की तो देवराज इंद्र ने गांव को डूबाने के लिए मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। श्रीकृष्ण ने सभी को बचाने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लिया। पूरे गांव वाले पूरे 7 दिनों तक गोवर्धन पर्वत के नीचे बैठे रहे। तब देवराज इंद्र को अपने किए पर पछतावा हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी।
- श्रीकृष्ण ने जब गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा तो गांव वालों ने मिलकर तरह-तरह के व्यंजन खिलाकर उत्सव मनाया। उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि थी। तभी से इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाने की परंपरा शुरू हुई, इसी परंपरा को अन्नकूट कहते हैं। इन 56 भोग में मिठाई, नमकीन, खट्टा, तीखा आदि कईं तरह के स्वाद वाले व्यंजन होते हैं।

ये हैं भगवान श्रीकृष्ण के 56 भोग के नाम

1. सूप (दाल), 2. चिल्डिका (चोला), 3. दधि (दही), 4. इक्षु खेरिणी (मुरब्बा), 5. त्रिकोण (शर्करा युक्त), 6. बटक (बड़ा), 7. मधु शीर्षक (मठरी), 8. फेणिका (फेनी), 9. पायस (खीर), 10. परिष्टाश्च (पूरी), 11. शतपत्र (खजला), 12. सधिद्रक (घेवर), 13. गोघृत, 14. मंडूरी (मलाई), 15. वायुपूर (रसगुल्ला), 16. चन्द्रकला (पगी हुई), 17. दधि (महारायता), 18. स्थूली (थूली), 19. कर्पूरनाड़ी (लौंगपूरी), 20. कषाय, 21. मधुर, 22. तिक्त, 23. सुधाकुंडलिका (जलेबी), 24. धृतपूर (मेसू), 25. खंड मंडल (खुरमा), 26. भक्त (भात), 27. कूपिका, 28. पर्पट (पापड़), 29. शक्तिका (सीरा), 30. कटु, 31. सिखरिणी (सिखरन), 32. अवलेह (शरबत), 33. बालका (बाटी), 34. चक्राम (मालपुआ), 35. अम्ल, 36. गोधूम (दलिया), 37. परिखा, 38. सुफलाढय़ा (सौंफ युक्त), 39. दधिरूप (बिलसारू), 40. मोदक (लड्डू), 41. शाक (साग) 42. सौधान (अधानौ अचार), 43. मंडका (मोठ), 44. प्रलेह (चटनी), 45. सदिका (कढ़ी), 46. दधिशाकजा (दही शाक की कढ़ी), 47. सुफला (सुपारी), 48. सिता (इलायची), 49. हैयंगपीनम (मक्खन), 50. फल, 51. तांबूल, 52. लसिका (लस्सी), 53. सुवत, 54. संघाय (मोहन), 55. मोहन भोग, 56. लवण।


Disclaimer 
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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