पत्नी गलती करे तो सजा पति को क्यों? चाणक्य की इस नीति में छिपा है गहरा रहस्य

Published : Jul 02, 2025, 04:35 PM IST
chankya niti

सार

Chankya Niti: आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत काम की हैं। अगर इन टिप्स को ठीक से समझकर जीवन में उतार लिया जाए तो कईं परेशानियों से बचा जा सकता है। चाणक्य ने पति-पत्नी से जुड़ी खास टिप्स भी अपनी पुस्तकों में बताई है। 

Chankya Niti Life Managment: आचार्य चाणक्य को भारत का महान अर्थशास्त्री, रणनीतिकारण और लाइफ मैनेजमेंट गुरु माना जाता है। उन्होंने जीवन के हर क्षेत्र से जुड़े टिप्स अपनी किताबों में लिखे हैं। इन टिप्स को अगर कोई साधारण व्यक्ति भी अपने जीवन में उतार ले तो वह भी महान बन सकता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी एक नीति में ऐसे लोगों के बारे में बताया जिनकी गलती की सजा उन्हें नहीं बल्कि दूसरों को मिलती है। जानें कौन हैं वो लोग…

चाणक्य नीति का श्लोक
राजा राष्ट्रकृतं पापं राज्ञ: पापं पुरोहित:।
भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्यपापं गुरुस्तथा।।

अर्थ- प्रजा की गलती का सजा राजा को, राजा के पाप का फल पुरोहित को, पत्नी की गलती की सजा पति को और शिष्य की गलती का नुकसान गुरु को उठाना पड़ता है।

पत्नी की गलती की सजा पति को क्यों?

विवाह के बाद पत्नी पूरी तरह से अपने पति पर निर्भर हो जाती है। पत्नी को सही-गलत के बारे में बताना पति का ही कर्तव्य होता है। अगर पति उसे ये बातें न बताए और पत्नी से कोई भूल जाए तो इसका परिणाम पति को ही भुगतना पड़ता है क्योंकि पत्नी तो पति के ही अधीन है। इसलिए पति का ये कर्तव्य है वह अपने पति को सही-गलत का ज्ञान दे।

प्रजा की गलती की सजा राजा को क्यों?

आचार्य चाणक्य के अनुसार, न्याय पूर्वक शासन करना राजा का पहला धर्म होता है। उसे इस बात का भी ध्यान रखना होता है कि उसकी प्रजा कोई गलत काम न करें। अगर कोई ऐसा करता भी है तो उसे उचित दंड मिलना चाहिए। अगर राजा ऐसा न करें तो प्रजा में अराजकता फैल जाएगी और इसका कारण राजा भी होगा। वर्तमान में यदि किसी राज्य में कोई कालाबाजारी का मामला सामने आता है तो इसका सीधा जिम्मेदार वहां के मुख्यमंत्री को ठहराया जाता है।

राजा की गलती की सजा पुरोहित को क्यों?

पुरोहित यानी वह व्यक्ति जो राजा को अच्छे-बुरे कर्मों के बारे में बताता और राय देता है। यदि राजा कोई गलती करे तो उसका पूरा दायित्व पुरोहित पर होता है। इसलिए आचार्य चाणक्य ने कहा है कि राजा की गलती का कारण पुरोहित होता है, उसे ही दंड मिलना चाहिए। यहां पुरोहित से अर्थ सलाहकार और ब्यूरोक्रेट्स से है।

शिष्य की गलती की सजा गुरु को क्यों?

शिष्य अल्प बुद्धि होता है यानी उसे दुनिया का बहुत कम ज्ञान होता है। इन्हीं बातों को सीखने के लिए उसे गुरु के पास भेजा जाता है और यदि गुरु अपने कर्तव्य को ठीक से न निभाई और शिष्य से कोई गलती हो जाए तो ऐसी स्थिति में शिष्य द्वारा की गई गलती के लिए गुरु को ही जिम्मेदार माना जाएगा और दंड भी उसे ही मिलेगा।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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