Guru Purnima Shlok: गुरु पूर्णिमा के इन श्लोक व दोहों से जानें जीवन में गुरु का महत्व

Published : Jul 10, 2025, 09:24 AM IST
guru purnima shalok

सार

Guru Purnima Shlok: 10 जुलाई, गुरुवार को आषाढ़ मास की पूर्णिमा है। इस दिन गुरु की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि गुरु ही हमें अच्छे-बुरे का ज्ञान देता है। गुरु का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। 

Guru Purnima Shlok: हर साल आषाढ़ मास में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 10 जुलाई, गुरुवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि गुरु ही हमें अच्छे-बुरे का ज्ञान देते हैं और भगवान तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। गुरु का महत्व बताने के लिए कईं श्लोक व दोहों की रचना भी की गई है। गुरु पूर्णिमा पर इन्हीं श्लोकों को बोलकर गुरु की पूजा की जाए तो जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। आगे जानिए गुरु पूर्णिमा से जुड़े कुछ ऐसे ही श्लोक और दोहे…

 

Guru Purnima Ke Shlok

गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा
गुरु साक्षात परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवे नमः
अर्थ- गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही भगवान शिव का रूप हैं। गुरु साक्षात परब्रह्म हैं, ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।

Guru Purnima Mantra

देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्।
ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते।।
अर्थ- भगवान, पंडित, गुरु और विद्वानों का पूजन, ये सभी शरीर से संबंधित तप कहलाते हैं। जो व्यक्ति हमें ज्ञान दे और भगवान की ओर ले जाए उसे ही गुरु मानना चाहिए।

Guru Purnima Sanskrit Shlok

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यिा माम शुचः ।।
अर्थ- ईश्वर तक पहुंचने के सभी मार्गों को छोड़कर सिर्फ गुरु की शरण लेने से ही सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे भगवान स्वत: ही मिल जाते हैं।

Guru Purnima Quotes In Sanskrit

स्वर्गो धनं वा धान्यं वा विद्या पुत्राः सुखानि च ।
गुरु वृत्युनुरोधेन न किंचितदपि दुर्लभम् ।।
अर्थ- गुरु की सेवा करने से आपको जीवन का हर सुख जैसे स्वर्ग, धन-धान्य, विद्या, पुत्र आदि सब कुछ मिल सकता है। गुरु के लिए आपको कुछ भी देना दुर्लभ नहीं है।

Guru Purnima Ke Dohe

बंदउं गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबिकर निकर।।
अर्थ- मनुष्य के रूप में दिखाई देने वाला गुरु स्वयं भगवान नारायण ही हैं। मैं सदैव उनकी वंदना करता हूं। जैसे सूर्य उदय होने से अंधेरा नष्ट हो जाता है, वैसे ही गुरु की बात मानने से मोह के अंधकार का भी नाश हो जाता है।

Guru Purnima Mantra In Sanskrit

गुरु बिनु भवनिधि तरइ न कोई।
जों बिरंचि संकर सम होई।।
अर्थ- गुरु के बिना कोई भी भव सागर को पार नहीं कर सकता, चाहे वो स्वयं भगवान ही क्यों न हो।

Guru Purnima Vandana

गुरु गोविन्द दोऊ खड़े,काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरु अपने गोविन्द दियो बताय।।
अर्थ- गुरु और भगवान साथ खड़े हों तो पहले गुरु को प्रणाम करना चाहिए क्योंकि गुरु की कृपा से ही हमें भगवान का दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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