Ram Navami 2025: तो क्या सीता स्वयंवर में नहीं गए थे भगवान श्रीराम, जानें क्या लिखा है धर्म ग्रंथों में?

Published : Apr 04, 2025, 10:09 AM IST
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सार

Ram Navami 2025: इस बार राम नवमी का पर्व 6 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा। मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। भगवान श्रीराम से जुड़ी अनेक रोचक बातें हैं, जो आमजन नहीं जानते। 

Ram Navami 2025: हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी तिथि पर त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने राम अवतार लिया था। इस बार ये पर्व 6 अप्रैल, रविवार को है। भगवान श्रीराम का विवाह राजा जनक की पुत्री देवी सीता से हुआ था। भगवान श्रीराम और देवी सीता के स्वयंवर का वर्णन अनेक ग्रंथों में मिलता है, लेकिन वाल्मीकि रामायण में सीता स्वयंवर का वर्णन नहीं है। आगे जानें क्या लिखा है वाल्मिकी रामायण में श्रीराम-सीता के विवाह के बारे में…

क्या कहती है रामचरित मानस?

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गई रामचरित मानस में सीता स्वयंवर का भव्य वर्णन मिलता है। इसके अनुसार, भगवान श्रीराम व लक्ष्मण अपने गुरु विश्वामित्र के साथ राजा जनक के दरबार में गए, वहां सीता स्वयंवर चल रहा था। देवी सीता से विवाह करने की शर्त ये थी कि जो भी राजा भगवान शिव के धनुष को उठाकर इस पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसी से देवी सीता का विवाह होगा। भगवान श्रीराम ने इस शर्त को पूरा कर देवी सीता से विवाह किया था।

क्या लिखा है वाल्मीकि रामायण में?

वाल्मीकि रामायण के लेखक स्वयं महर्षि वाल्मीकि हैं जो भगवान श्रीराम का समकालीन थे। महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में ही देवी सीता ने लव-कुश को जन्म दिया था। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, श्रीराम व लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिला गए थे। तब राजा जनक उन्हें शिवधनुष के बारे में बताया। ऋषि विश्वामित्र ने राजा जनक से श्रीराम को वह शिवधनुष दिखाने के लिए कहा। वाल्मीकि रामायण के अनुसार…
नृणां शतानि पंचाशद्व्यायतानां महात्मनाम्।
मंजूषामष्टचक्रां तां समूहुस्ते कथंचन।।
अर्थ- राजा जनक ने भगवान शिव का वह दिव्य धनुष एक लोहे के बक्से में रखा था, जिसमें 8 पहिए थे। उसे कई हजार लोग बड़ी मुश्किल से खींच रहे थे।

ऐसे हुआ श्रीराम-सीता का विवाह

जब वह धनुष भगवान श्रीराम के सामने आया तो उन्होंने से देखने के लिए उठा लिया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। तब राजा जनक ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार श्रीराम को देवी सीता से विवाह करने के लिए निवेदन किया। श्रीराम ने अपने गुरु के आदेश पर इस निवेदन को स्वीकार किया। ये खबर जब अयोध्या पहुंची तो राजा दशरथ अपने मंत्रियों और परिवार के साथ जनकपुरी आए, इसके बाद श्रीराम का देवी सीता से विवाह हुआ।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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