क्या सचमुच महादेव के अवतार थे आदि गुरु शंकराचार्य? जानें उनसे जुड़े 5 रहस्य

Published : May 01, 2025, 10:04 AM IST
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सार

Shankaracharya Jayanti 2025: आदि गुरु शंकराचार्य के बारे में हम सभी जरूर सुना होगा। विद्वान उन्हें साक्षात महादेव का अवतार कहते हैं क्योंकि कम उम्र में इतने सारे चमत्कार करना किसी साधारण व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। 

Shankaracharya Jayanti 2025: हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती मनाई जाती है। इस बार ये तिथि 2 मई, शुक्रवार को है। 788 ईस्वी में इनका जन्म केरल के कालड़ी गांव में नम्बूदरी ब्राह्मण कुल में हुआ था। इनके बारे में कहा जाता है कि ये साक्षात भगवान शिव के अवतार थे क्योंकि आदि गुरु शंकराचार्य ने कम उम्र में जो चमत्कार किए वो किसी साधारण व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। उन्होंने सनातन धर्म की पुन:स्थापित किया और अखाड़ों की नींव रखी। साथ ही अनेक मठ मंदिरों की स्थापना की। आगे जानिए आदि गुरु शंकराचार्य से जुड़े 5 रहस्य…

8 साल की आयु में पढ़ लिए सारे वेद

आदि गुरु शंकराचार्य बाल्यकाल से ही बहुत विद्वान थे। उन्होंने मात्र 8 साल की उम्र में ही सारे वेद का ज्ञान प्राप्त कर लिया। इतनी कम उम्र के बच्चे के लिए वेदों का अध्ययन कर लेना और उन्हें कंठस्थ करना कोई साधारण बात नहीं थी, इससे पता चलता है कि उनमें कोई दिव्य शक्ति थी।

3 बार किया पूरे देश का भ्रमण

आदि गुरु शंकराचार्य ने जब देखा कि अन्य धर्म सनातन पर हावी हो रहे हैं तो वे भारत यात्रा पर निकले और देश के अलग-अलग हिस्सों में मठ-मंदिरों की स्थापना की। इन्होंने 3 बार पूरे भारत की यात्रा की थी। बद्रीनाथ-केदारनाथ आदि मंदिरों की पुर्नस्थापना भी इन्होंने ही की।

इसलिए इन्हें मानते हैं महादेव का अवतार

आदि शंकराचार्य के विषय में कहा गया है-
अष्टवर्षेचतुर्वेदी, द्वादशेसर्वशास्त्रवित्
षोडशेकृतवान्भाष्यम्द्वात्रिंशेमुनिरभ्यगात्

अर्थात्- आदि गुरु शंकराचार्य 8 वर्ष की आयु में चारों वेदों में निपुण हो गए, 12 वर्ष की आयु में उन्होंने सभी शास्त्र पढ़ लिए। मात्र 16 वर्ष की आयु में शांकरभाष्य की रचना की और 32 वर्ष की आयु में उन्होंने शरीर त्याग दिया। आदि गुरु शंकराचार्य ने कईं ऐसे चमत्कार किए जो सामान्य मनुष्य के लिए सम्भव नहीं थे। इसलिए इन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है।

करवाई सोने की बारिश

एक बार एक गरीब ब्राह्मण के मन में दान की भावना देखकर आदि गुरु शंकराचार्य बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने उसी समय कनकधारा स्त्रोत की रचना की और उसका पाठ किया, जिससे देवी लक्ष्मी ने प्रसन्न होकर उस गरीब व्यक्ति के घर में सोने की बारिश की।

इन्होंने ही की 4 मठों की स्थापना

आदि गुरु शंकराचार्य ने सनातन परंपरा की जीवित रखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में 4 मठों की स्थापना की। इन मठों के प्रमुख आज भी शंकराचार्य ही कहलाते हैं। ये 4 मठ ही प्रमुख 13 अखाड़ों के साधु-संतों को नियंत्रित करते हैं।


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