Unique Temple: किस मुस्लिम देश में है देवी लक्ष्मी का शक्तिपीठ?, जहां गिरी थी देवी सती की गर्दन

Published : Oct 11, 2025, 03:38 PM IST
Unique Temple

सार

Unique Temple: भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में देवी लक्ष्मी का एक प्राचीन मंदिर है। इसे महालक्ष्मी भैरवी ग्रीवा शक्तिपीठ कहा जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर देवी सती की ग्रीवा यानी गर्दन गिरी थी।

Unique temple of Goddess Lakshmi in Bangladesh: इस बार दिवाली 20 अक्टूबर, सोमवार को है। इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। देवी लक्ष्मी के अनेक प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर हमारे देश में है। ऐसा ही एक मंदिर बांग्लादेश में भी है। इसे महालक्ष्मी भैरवी ग्रीवा शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर की स्थापना कब और कैसे हुई, इसकी सटीक जानकारी किसी के पास नहीं है। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी रोचक बातें…

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ब्रह्मदेव ने यहीं की थी महालक्ष्मी की पूजा

देवी लक्ष्मी का ये प्राचीन मंदिर बांग्लादेश के सिलहट जिले के दक्षिण सूरमा उप जिला के जैनपुर गांव में स्थित है। इस मंदिर से जुड़ी अनेक मान्यताएं हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं। कहते हैं कि प्राचीन समय में इसी स्थान पर भगवान ब्रह्मदेव का आश्रम था। जहां ब्रह्मदेव ने पहली बार देवी लक्ष्मी की पूजा की थी। बाद में इसी स्थान पर देवी महालक्ष्मी प्रकट भी हुई थीं।

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महालक्ष्मी के साथ भैरवी की भी होती है पूजा

देवी लक्ष्मी का ये मंदिर 2 मंजिला है। नीचे देवी भैरवी और ऊपरी मंजिल पर देवी महालक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। विशेष मौकों पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। नवरात्रि, दिवाली आदि मौकों पर यहां विशेष पूजन किया जाता है। ये स्थान तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए भी प्रसिद्ध है। खास मौकों पर यहां तांत्रिकों का जमावड़ा भी लगता है।

ये है मंदिर से जुड़ी रोचक कथा

इस मंदिर से जुडी एक रोचक कथा भी है। उसके अनुसार 12वीं-13वीं शताब्दी के दौरान जब देवी प्रसाद दास नाम का व्यक्ति यहां मजदूरों से सड़क बनवाने का काम करवा रहा था, तब मिट्टी खोदने के दौरान यहां एक काली चट्टान निकली। काफी कोशिशों के बाद में मजदूर उसे हटा नहीं पाए। रात में देवी महालक्ष्मी ने देवी प्रसाद को सपने में आकर कहा ‘तुम मुझे इसी जगह पर स्थापित कर रोज मेरी पूजा की व्यवस्था करो।’ देवी प्रसाद ने जब उस शिला को बाहर निकलवाया तो देवी की प्रतिमा देखकर वो अचंभित रह गया। बाद में देवी प्रसाद ने इसी स्थान पर मंदिर बनवाकर देवी की प्रतिमा यहां स्थापित करवा दी। तब से आज तक देवी प्रसाद के वशंज ही इस मंदिर की देख-भाल कर रहे हैं।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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