Buddha Purnima 2025: एक राजकुमार कैसे बना बुद्ध, कब है Buddha Jayanti 11 या 12 मई?

Published : May 07, 2025, 12:58 PM ISTUpdated : May 08, 2025, 12:38 PM IST
Buddha Purnima 2025

सार

Buddha Purnima 2025: वैशाख मास की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, हालांकि इसे लेकर अलग-अलग मत हैं। 

Buddha Jayanti Kab Hai: बुद्ध भगवान विष्णु के 10 प्रमुख अवतारों में से एक माने जाते हैं। मान्यता है कि वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि पर ही भगवान विष्णु ने बुद्ध के रूप में जन्म लिया था। भगवान बुद्ध से ही बौद्ध धर्म की शुरूआत हुई। बुद्ध ने अपने जीवन में अनेक चमत्कार किए और लोगों को जीने का सही मार्ग दिखाया। इस बार बुद्ध जयंती का पर्व मई 2025 में माया जाएगा। जानें बुद्ध जयंती की सही डेट और इससे जुड़ी खास बातें…

कब है बुद्ध पूर्णिमा?

पंचांग के अनुसार, वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि 11 मई, रविवार की रात 08 बजकर 02 मिनिट से शुरू होगी, जो अगले दिन यानी 12 मई की रात 10 बजकर 25 मिनिट तक रहेगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि का सूर्योदय 12 मई को होगा, इसलिए इसी दिन बुद्ध जयंती का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गौतम बुद्ध की 2587वीं जयंती मनाई जाएगी।

बुद्ध जयंती के शुभ मुहूर्त

सुबह 09:07 से 10:45 तक
सुबह 11:57 से दोपहर 12:49 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 02:01 से 03:39 तक
शाम 05:17 से 06:55 तक

जानें राजकुमार सिद्धार्थ कैसे बना बुद्ध?

बौद्ध ग्रंथों के अनुसार भगवान बुद्ध का जन्म छठी शताब्दी में हुआ था। इनके पिता का नाम राजा शुद्धोधन माता का नाम महामाया था। बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। 16 वर्ष की आयु में ही इनका विवाह यशोधरा नाम की राजकुमारी से हो गया। यशोधरा ने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम राहुल रखा गया।
राजकुमार सिद्धार्थ पहली बार नगर में घूमने निकले तो उन्हें एक रोगी, एक बूढ़ा आदमी और एक मृत व्यक्ति दिखाई दिया। इन्हें देखकर सिद्धार्थ के मन में वैराग्य आ गया। उन्होंने महल छोड़ दिया और ज्ञान की तलाश में भटकने लगे। 35 साल की उम्र में सिद्धार्थ बोधगया में एक पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई।
इसके बाद सिद्धार्थ महात्मा बुद्ध कहलाने लगे। इस तरह एक राजकुमार महात्मा बुद्ध बन गया। महात्मा बुद्ध ने लोगों को अहिंसा का पाठ पढ़ाया और जीवन जीने का सही मार्ग दिखाया। महात्मा बुद्ध से ही बौद्ध धर्म शुरू हुआ। आज भी बौद्ध धर्म के अनेक अनुयायी अलग-अलग देशों में रहते हैं।


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