Vat Savitri Vrat Katha: सावित्री के आगे यमराज ने भी मानी हार, लौटाने पड़े पति के प्राण! वट सावित्री व्रत की रोचक कथा

Published : May 15, 2026, 07:00 PM IST
Vat Savitri Vrat Katha

सार

Vat Savitri Vrat Katha In Hindi: हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर तिथि वट सावित्री व्रत किया जाता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत-पूजा करती हैं। इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी है।

Vat Savitri Vrat Story: इस बार वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को किया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत करती हैं। इस व्रत में वट वृक्ष के साथ ही यमराज, ब्रह्मा-सावित्री की पूजा की जाती है। इस व्रत से जुड़ी सावित्री-सत्यवान की एक कथा भी है, जिसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। व्रती (व्रत करने वाले) को ये कथा जरूर सुननी चाहिए। आगे पढ़ें वट सावित्री व्रत की ये रोचक कथा…

वट सावित्री व्रत की कथा

महाभारत की कथा के अनुसार, प्राचीन समय में भद्र देश पर राजा अश्वपति का शासन था। वे बहुत प्रतापी राजा थे, लेकिन संतान न होने के कारण हमेशा दुखी रहते थे। संतान प्राप्ति की इच्छा से उन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या की और देवी सावित्री की आराधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें पुत्री प्राप्ति का वरदान दिया। कुछ समय बाद राजा के घर एक सुंदर कन्या का जन्म हुआ, जिसका नाम सावित्री रखा गया।

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सावित्री बड़ी होकर बेहद गुणवान, बुद्धिमान और तेजस्वी थी। जब उनके विवाह की बात आई तो राजा अश्वपति ने उन्हें स्वयं योग्य वर चुनने की अनुमति दी। यात्रा के दौरान सावित्री की मुलाकात जंगल में रहने वाले राजकुमार सत्यवान से हुई। सत्यवान राजा द्युमत्सेन के पुत्र थे, जिनका राज्य शत्रुओं ने छीन लिया था। सावित्री ने सत्यवान को ही अपना पति चुन लिया।

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जब सावित्री ने अपने पिता को यह बात बताई, तभी नारद मुनि वहां पहुंचे और उन्होंने बताया कि सत्यवान बहुत गुणी हैं, लेकिन उनकी आयु बहुत कम है और विवाह के एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी। यह सुनकर राजा अश्वपति चिंतित हो गए और सावित्री को दूसरा वर चुनने के लिए कहा, लेकिन सावित्री अपने निर्णय से नहीं हटीं। अंततः उनका विवाह सत्यवान से कर दिया गया।

विवाह के बाद सावित्री अपने पति और सास-ससुर की सेवा में लग गईं। जब सत्यवान की मृत्यु का दिन नजदीक आया तो सावित्री ने कठोर व्रत रखा। तय दिन वह सत्यवान के साथ जंगल गईं। वहां लकड़ी काटते समय सत्यवान अचानक बेहोश होकर सावित्री की गोद में गिर पड़े। तभी यमराज उनके प्राण लेने पहुंचे।

यमराज सत्यवान की आत्मा लेकर जाने लगे तो सावित्री भी उनके पीछे चल पड़ीं। उनकी निष्ठा और समर्पण देखकर यमराज ने कई वरदान दिए। अंत में सावित्री ने चतुराई से ऐसा वरदान मांगा, जिससे सत्यवान को जीवन वापस मिल गया। इस तरह सावित्री ने अपने पतिव्रत धर्म और दृढ़ संकल्प से अपने पति के प्राण वापस पा लिए।


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