युधिष्ठिर का वध क्यों करना चाहते थे अर्जुन, कैसे और क्यों हुई ये विचित्र घटना?

Published : Nov 21, 2019, 09:24 AM IST
युधिष्ठिर का वध क्यों करना चाहते थे अर्जुन, कैसे और क्यों हुई ये विचित्र घटना?

सार

महाभारत के प्रमुख पात्र अर्जुन अपने बड़े भाई युधिष्ठिर को बहुत ही मान- सम्मान देते थे, ये बात सभी जानते हैं, लेकिन यह बात बहुत कम जानते हैं कि एक बार अर्जुन ने युधिष्ठिर का वध करने के लिए तलवार उठा ली थी।

उज्जैन. महाभारत के कर्ण पर्व में बताया गया है कि जब अर्जुन ने युधिष्ठिर को मारने के लिए तलवार उठाई, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें किस प्रकार बचाया। ये प्रसंग इस प्रकार है...

कर्ण से हार गए थे युधिष्ठिर...
- गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु के बाद कर्ण को कौरव सेना का सेनापति बनाया गया। सेनापति बनते ही कर्ण ने पांडवों की सेना में खलबली मचा दी। कर्ण द्वारा अपनी सेना का सफाया होते देख युधिष्ठिर उससे युद्ध करने पहुंचे।
-कर्ण ने युधिष्ठिर को घायल कर दिया। युधिष्ठिर को घायल देख सारथी उन्हें युद्ध से दूर ले गया। इस बारे में जब अर्जुन को पता लगा, तो वे श्रीकृष्ण के साथ युधिष्ठिर को देखने उनकी छावनी में पहुंचे।
- अर्जुन और श्रीकृष्ण को एक साथ देखकर धर्मराज युधिष्ठिर ने समझा कि अर्जुन ने कर्ण का वध कर मेरी पराजय का बदला ले लिया है।

इसलिए युधिष्ठिर को मारने वाले थे अर्जुन...
- जब युधिष्ठिर को पता चला कि कर्ण अभी तक जीवित है तो उन्हें अर्जुन पर बहुत क्रोध आया और उन्होंने अपने शस्त्र दूसरे को देने के लिए कह दिया।
- यह सुनते ही अर्जुन को बहुत क्रोध आया और उन्होंने युधिष्ठिर को मारने के लिए तलवार उठा ली। श्रीकृष्ण उसकी मंशा ताड़ गए और उन्होंने अर्जुन को रोक दिया।
- अर्जुन ने श्रीकृष्ण को बताया कि- मैंने गुप्त रूप से प्रतिज्ञा की थी कि जो कोई मुझसे अपने शस्त्र दूसरे को देने के लिए कहेगा, मैं उसका सिर काट लूंगा।
- श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि- तुम आज युधिष्ठिर का थोड़ा अपमान कर दो। सम्मान योग्य व्यक्ति का अपमान करना उसकी हत्या करने जैसा ही है। श्रीकृष्ण की बात मानकर अर्जुन ने युधिष्ठिर को ऐसे कटुवचन कहे, जैसे पहले कभी नहीं कहे थे।

अर्जुन चाहते थे आत्महत्या करना..
- युधिष्ठिर का अपमान करने से अर्जुन को बहुत दुख हुआ और उन्होंने आत्महत्या करने के लिए तलवार उठा ली। श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि तुम स्वयं की तारीफ करो, ऐसा करना आत्महत्या करने के समान है। अर्जुन ने ऐसा ही किया।
- अर्जुन के कठोर वचन सुनकर युधिष्ठिर बहुत दु:खी हुए और वन जाने के लिए तैयार हो गए। तब श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि- मेरे ही कहने पर अर्जुन ने आपका अनादर किया है। उसे आप क्षमा कीजिए।
- इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन और युधिष्ठिर, दोनों को ही अधर्म करने से रोक लिया। इस प्रकार अर्जुन व श्रीकृष्ण पुन: अपने रथ पर सवार होकर युद्ध करने निकल पड़े।

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