
पूरी दुनिया में फुटबॉल का खुमार चढ़ने में अब बस कुछ ही महीने बाकी हैं। लेकिन भारत में फुटबॉल फैंस के मन में एक बड़ा सवाल है - क्या हम वर्ल्ड कप देख पाएंगे? इस सवाल का जवाब न तो फीफा के पास है और न ही भारत की किसी बड़ी ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के पास। यह शायद लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे दिग्गजों का आखिरी वर्ल्ड कप हो, और पूरी दुनिया उनकी जादूगरी देखने का इंतजार कर रही है। पर भारत में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स को लेकर मामला फंसा हुआ है। चलिए समझते हैं कि आखिर ऐसा क्यों है।
इस बार का वर्ल्ड कप अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा के 16 शहरों में हो रहा है और इसकी शुरुआत 12 जून को होगी। पहला मैच मेजबान मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के बीच है। पिछले महीने फीफा ने एशिया के बाजार के लिए ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की जानकारी जारी की थी। इस लिस्ट में जापान, इंडोनेशिया, सिंगापुर और हॉन्ग कॉन्ग जैसे देश तो थे, लेकिन फुटबॉल के दीवानों और आबादी के लिहाज से इतना बड़ा बाजार होने के बावजूद भारत का नाम गायब था।
फीफा के ही आंकड़ों के मुताबिक, 2022 का कतर वर्ल्ड कप भारत के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक था। चीन के बाद भारत का ही नंबर था। भारत में कुल मीडिया एंगेजमेंट 745 मिलियन था, जबकि टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 167 मिलियन लोगों ने मैच देखे। ज्यादातर लोगों ने मैच देखने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया था।
इसी वजह से इस बार फीफा ने 2026 और 2030, दोनों वर्ल्ड कप के राइट्स के लिए करीब 100 मिलियन डॉलर (लगभग 835 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम कीमत रखी थी। लेकिन कोई भी कंपनी आगे नहीं आई। इसके बाद फीफा ने कीमत घटाकर 65 मिलियन डॉलर और फिर 35 मिलियन डॉलर (करीब 324 करोड़ रुपये) तक कर दी, लेकिन बात फिर भी नहीं बनी।
याद दिला दें कि कतर वर्ल्ड कप के राइट्स Viacom18 ने 62 मिलियन डॉलर (करीब 574 करोड़ रुपये) में खरीदे थे। अब Viacom और Star का विलय हो चुका है और वे Jio-Hotstar बन गए हैं, जिससे बोली लगाने वाली बड़ी कंपनियों की संख्या भी कम हो गई है। लेकिन यह असली वजह नहीं है। सबसे बड़ा विलेन है मैचों का टाइमिंग।
वर्ल्ड कप के 104 मैचों में से सिर्फ 13 मैच ही भारतीय समय के हिसाब से रात 9:30 या 10:30 बजे हैं। बाकी सभी मैच देर रात या सुबह-सुबह खेले जाएंगे। ऐसे समय पर लाइव दर्शक जुटाना ब्रॉडकास्टर्स के लिए एक बड़ी चुनौती और घाटे का सौदा हो सकता है।
भारत में फुटबॉल के गढ़ केरल, गोवा और नॉर्थ-ईस्ट के राज्य हैं। इन इलाकों के बाहर देर रात के मैचों के लिए बड़ी संख्या में दर्शकों को स्क्रीन तक खींच पाना बहुत मुश्किल होगा। कतर वर्ल्ड कप के साथ समय की कोई दिक्कत नहीं थी। इसके अलावा, विज्ञापनों से होने वाली कमाई भी एक बड़ी चिंता है। क्रिकेट की तरह फुटबॉल में हर ओवर के बाद ब्रेक नहीं मिलता, जिससे विज्ञापन दिखाने के मौके बहुत कम होते हैं।
अगर हम दूसरे फुटबॉल लीग्स को देखें, तो प्रीमियर लीग के राइट्स की कीमत में भी गिरावट आई है। 2013-16 में जो राइट्स 145 मिलियन डॉलर के थे, आज वो 65 मिलियन डॉलर पर आ गए हैं। स्पेनिश ला लिगा का हाल भी कुछ ऐसा ही है। वहीं, भारत में क्रिकेट की दीवानगी एक अलग ही लेवल पर है। ब्रॉडकास्टर्स ने ICC और BCCI टूर्नामेंट्स पर लगभग 9000 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि बाकी खेलों पर सिर्फ 500 करोड़ रुपये। अगर यही हालात बने रहे और फीफा कोई रास्ता नहीं निकाल पाया, तो भारत में करोड़ों फुटबॉल फैंस का वर्ल्ड कप देखने का सपना अधूरा रह सकता है।