
DRS RULE CHANGE: क्रिकेट के सबसे बड़े टी20 टूर्नामेंट Indian Premier League के नए सीजन की शुरुआत हो चुकी है। अभी सिर्फ दो मैच खेले गए हैं, लेकिन इस बीच कुछ नए नियमों को लेकर धीरे-धीरे तस्वीर साफ होने लगी है।
इस बार टूर्नामेंट में कई नियमों में बदलाव किए गए हैं, जिनमें सबसे बड़ा बदलाव डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) के इस्तेमाल को लेकर हुआ है। Board of Control for Cricket in India यानी BCCI ने इस नियम में बदलाव करके टीमों की चालाकी पर लगाम लगाने की कोशिश की है। नए नियम के मुताबिक अब एक DRS में थर्ड अंपायर सिर्फ उसी फैसले की जांच करेगा, जिसके लिए अपील की गई है। यानी एक रिव्यू पर अब केवल एक ही चेक होगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक नया सीजन शुरू होने से पहले सभी 10 टीमों के कप्तानों की एक मीटिंग हुई थी, जिसमें इस बदलाव के बारे में विस्तार से बताया गया। इस मीटिंग में BCCI के मैच रेफरी हेड Javagal Srinath और अंपायरिंग हेड Nitin Menon ने टीमों को समझाया कि नया DRS नियम कैसे काम करेगा और मैच के दौरान इसे किस तरह इस्तेमाल करना होगा।
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पिछले सीजन तक जब कोई टीम DRS लेती थी, तो थर्ड अंपायर सिर्फ उसी फैसले की नहीं बल्कि उससे जुड़े दूसरे पहलुओं की भी जांच कर सकता था। उदाहरण के तौर पर, अगर फील्डिंग टीम ने कैच की अपील की और अंपायर ने उसे नॉट-आउट दिया, तो DRS लेने पर टीवी अंपायर यह भी देख सकता था कि गेंद वाइड थी या नहीं। यानी एक रिव्यू में कई चीजों की जांच हो जाती थी, जिससे कई बार टीमों को अतिरिक्त फायदा मिल जाता था।
IPL 2026 में यह नियम पूरी तरह बदल दिया गया है। अब अगर फील्डिंग टीम कैच के फैसले के खिलाफ DRS लेती है, तो टीवी अंपायर सिर्फ यही देखेगा कि कैच हुआ या नहीं। वह वाइड बॉल या किसी दूसरे पहलू की जांच नहीं करेगा। अगर बल्लेबाज को लगता है कि गेंद उसके बल्ले से नहीं लगी और उसे वाइड दिया जाना चाहिए था, तो उसे खुद DRS लेना होगा।
नए नियम के तहत बल्लेबाज को भी DRS की अपील करने के लिए सिर्फ 15 सेकेंड का समय मिलेगा। सबसे अहम बात यह है कि टीवी अंपायर का फैसला आने के बाद दोबारा अपील के लिए अलग से 15 सेकेंड नहीं मिलेंगे। यानी खिलाड़ियों को तुरंत फैसला लेना होगा कि उन्हें रिव्यू लेना है या नहीं।
DRS के अलावा एक और अहम बदलाव कनकशन सब्स्टीट्यूट के नियम में किया गया है। अगर किसी खिलाड़ी को सिर पर चोट लगने के कारण मैदान से बाहर जाना पड़ता है, तो उसकी जगह आने वाला खिलाड़ी उन्हीं 5 खिलाड़ियों में से चुना जाएगा जिन्हें पहले से इम्पैक्ट सब्स्टीट्यूट के तौर पर रखा गया है।
अगर किसी विदेशी खिलाड़ी को कनकशन होता है, तो उसकी जगह विदेशी खिलाड़ी तभी आ सकेगा जब टीम की प्लेइंग-11 में सिर्फ 3 विदेशी खिलाड़ी हों। अगर पहले से 4 विदेशी खिलाड़ी मैदान में हैं, तो उसकी जगह किसी भारतीय खिलाड़ी को ही मौका मिलेगा।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का मकसद मैच के दौरान अनावश्यक रिव्यू और नियमों के दुरुपयोग को रोकना है। BCCI चाहता है कि DRS का इस्तेमाल साफ और सीमित तरीके से हो, ताकि मैच का फैसला तेजी से और पारदर्शी ढंग से हो सके।
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