
नई दिल्लीः ये टीम चमत्कारों और वापसी की कहानी है। ये वो टीम है जो नामुमकिन से दिखने वाले आंकड़ों को भी पार कर जाती है। इनकी हार पक्की करने के लिए आपको आखिरी गेंद तक इंतज़ार करना पड़ सकता है। अगर उससे पहले आपके मन में जीत की खुशी आई, तो समझिए वो उसे छीनने के लिए तैयार बैठे हैं। याद रखिए, क्रिकेट के भगवान (सचिन) को एक बार दर्द देने का बदला इन्होंने महेंद्र सिंह धोनी जैसे दिग्गज से तीन बार लिया है। वानखेड़े के स्टैंड्स से यही आवाज़ आ रही है कि इस बार कोई और खिताब का सपना लेकर मैदान में न उतरे। द OG मुंबई इंडियंस।
चार सीज़न के बाद 2025 का एडिशन ऐसा था, जिसमें मुंबई ने अपने नाम और रुतबे के साथ पूरा न्याय किया। भले ही अहमदाबाद में श्रेयस अय्यर ने अकेले दम पर छठे खिताब का सपना तोड़ दिया, लेकिन उस रात के बाद भी फैंस ने डंके की चोट पर कहा, 'हमारे पास एक नंबर टीम है।' ज़रा उस स्क्वॉड पर नज़र तो डालिए, ये नाम दुनिया की किसी भी टीम को डराने के लिए काफी हैं।
पावरप्ले में विकेट लेने की सोचकर गेंद उठाने वाले विरोधी गेंदबाज़ों के सामने पहाड़ की तरह खड़ा मिलेगा मुंबई का राजा, रोहित शर्मा। और याद रहे, ये वो पुराने वाले बेफिक्र रोहित नहीं हैं। साथ में क्विंटन डी कॉक और रयान रिकेल्टन। अगर आप सोच रहे हैं कि बीच के ओवरों में मैच पकड़ लेंगे, तो वहां भी आप गलत हैं। सूर्यकुमार यादव, तिलक वर्मा और विल जैक्स जैसे खिलाड़ी इंतज़ार कर रहे हैं। और डेथ ओवर्स में तो गेंदबाज़ों के लिए खतरे की घंटी बजेगी, जब हार्दिक पंड्या, शेरफेन रदरफोर्ड और नमन धीर मैदान पर होंगे। और सब के सब अपने पीक फॉर्म में।
अब बात गेंदबाज़ी की। विरोधी बल्लेबाज़ों के स्टंप्स पहले ही ओवरों में उखाड़ने के लिए ट्रेंट बोल्ट और दीपक चाहर तैयार हैं। जब इन दोनों का खौफ खत्म होगा, तो हार्दिक पंड्या अपना 'बुर्मास्त्र' चलाएंगे - जसप्रीत बुमराह। उन्हें रोकने वाला आज की तारीख में वर्ल्ड क्रिकेट में कौन है, ये अपने आप में एक सवाल है। साथ में खुद हार्दिक और मिचेल सैंटनर की अगुवाई वाली स्पिन यूनिट भी है।
सब कुछ मुंबई के पक्ष में है। लेकिन टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती भी यही है। इन धुरंधर नामों में से प्लेइंग 11 कैसे चुनें? रोहित, सूर्या, तिलक, हार्दिक, बुमराह, बोल्ट - ये कोर टीम आपको मुंबई के हर मैच में दिख सकती है। पिछले सीज़न की तरह रोहित को सिर्फ इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर देखने की उम्मीद मत कीजिए, क्योंकि उनके सामने एक बहुत बड़ा लक्ष्य बाकी है।
मुंबई के असली एक्सपेरिमेंट विदेशी खिलाड़ियों को लेकर होंगे। ओपनिंग स्लॉट पर ही रिकेल्टन और डी कॉक हैं। डी कॉक को तो मुंबई ने खास रिक्वेस्ट करके ऑक्शन में शामिल करवाया था। अब रोहित के साथ क्रीज़ पर कौन उतरेगा, यह पहली चिंता है। रिकेल्टन के पिछले सीज़न के प्रदर्शन को मैनेजमेंट आसानी से नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। बोल्ट के अलावा एक और विदेशी ओपनर होगा। अब बचते हैं सिर्फ दो स्लॉट। और दावेदार हैं - विल जैक्स, मिचेल सैंटनर, शेरफेन रदरफोर्ड और कॉर्बिन बॉश।
जैक्स अपने करियर के सबसे बेहतरीन फॉर्म में हैं। टी20 वर्ल्ड कप के आठ मैचों में 176 की स्ट्राइक रेट से 226 रन, और साथ में नौ विकेट भी। जैक्स को बाहर बिठाना लगभग नामुमकिन होगा। वहीं, रदरफोर्ड ने 179 की स्ट्राइक रेट से 183 रन बनाकर विंडीज़ को वर्ल्ड कप में विस्फोटक फिनिश दिए। सैंटनर एक अनुभवी स्पिनर हैं, सिर्फ कॉर्बिन बॉश ही थोड़े फॉर्म से बाहर चल रहे हैं।
विदेशी खिलाड़ियों का चुनाव ही मुंबई के लिए सबसे अहम होगा, और शुरुआत में ही एक विनिंग कॉम्बिनेशन ढूंढना ज़रूरी है। अगर इस एक चिंता को छोड़ दें, तो मुंबई के पक्ष में कई बातें हैं। उनके पास मैच जिताने वाले ऑलराउंडर्स की एक लंबी लाइन है - हार्दिक, जैक्स, सैंटनर, बॉश, शार्दुल ठाकुर, चाहर। और इन सबसे ऊपर, खिताब तक पहुंचाने वाले शानदार क्रिकेटिंग ब्रेन। रोहित, सूर्या और सैंटनर का अनुभव कप्तान हार्दिक के साथ है। छठे खिताब के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए मुंबई के सामने पिछले पांच सालों में इतने अच्छे हालात नहीं बने।