न्यूयॉर्क: 2026 फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर में स्विट्जरलैंड और कतर के बीच हुए मैच में VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले पर अब फीफा ने खुद एक आधिकारिक बयान जारी किया है। दरअसल, मैच में एक ऐसा फैसला लिया गया था जो पूरे खेल का नतीजा बदल सकता था, और इसी को लेकर फैंस और फुटबॉल एक्सपर्ट्स ने काफी नाराजगी जताई थी।
यह पूरा विवाद स्विट्जरलैंड को मिलने वाली एक संभावित पेनल्टी से जुड़ा है। हुआ ये कि बॉक्स के अंदर स्विस खिलाड़ी रेमो फ्रूलर को गिराया गया, लेकिन रीप्ले में दिखा कि वह ऑफसाइड पोजीशन में थे। नियमों के मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी पहले से ही ऑफसाइड है, तो उसके बाद हुए फाउल पर पेनल्टी नहीं दी जा सकती। विवाद इस बात पर हुआ कि रेफरी के इस फैसले को चेक करने के लिए VAR ने कोई दखल नहीं दिया, जिससे फैंस भड़क गए।
फीफा ने वर्ल्ड कप से पहले दावा किया था कि उन्होंने 'सेमी-ऑटोमेटेड ऑफसाइड' टेक्नोलॉजी तैयार की है, जो ज्यादा सटीक फैसले देती है। लेकिन हैरानी की बात है कि इस विवादित फैसले का कोई डिजिटल एनिमेशन फुटेज जारी नहीं किया गया। इसके बजाय, फीफा ने रेफरी के फैसले का पूरा समर्थन किया। फीफा ने साफ किया कि यह फैसला फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय नियमों और VAR प्रोटोकॉल के तहत ही लिया गया था।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि मैदान पर मौजूद रेफरी और VAR रूम के बीच बातचीत बिल्कुल साफ थी और आखिरी फैसला लेने से पहले सभी कैमरा एंगल को अच्छी तरह से जांचा गया था। इस घटना ने एक बार फिर फुटबॉल में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और उसकी सटीकता पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इस मैच में स्विट्जरलैंड को अपनी गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा, जबकि कतर एक मजबूत टीम के खिलाफ एक ऐतिहासिक पॉइंट हासिल करने में कामयाब रहा।