
Islam Makhachev Wrestling: UFC 330 से पहले इस्लाम मखाचेव और इयान मचाडो गैरी के बीच होने वाला मुकाबला लगातार चर्चा में बना हुआ है। दोनों फाइटर्स 15 अगस्त को फिलाडेल्फिया में UFC वेल्टरवेट टाइटल के लिए आमने-सामने होंगे। इस फाइट से पहले सबसे ज्यादा चर्चा दोनों के शारीरिक अंतर को लेकर हो रही है। कई फैंस का मानना है कि गैरी की लंबाई और रीच उन्हें इस मुकाबले में बढ़त दिला सकती है। हालांकि, दूसरी ओर इस्लाम मखाचेव अपने शानदार रेसलिंग गेम, बेहतरीन रणनीति और बड़े मुकाबलों के अनुभव के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या गैरी का शारीरिक फायदा मखाचेव के अनुभव और कौशल पर भारी पड़ पाएगा?
इस्लाम रमजानोविच मखाचेव रूस के पेशेवर मिक्स्ड मार्शल आर्टिस्ट हैं। 27 अक्टूबर 1991 को पैदा हुए मखाचेव अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (यूएफसी) के वेल्टरवेट डिवीजन में प्रतिस्पर्धा करते हैं , जहां वह वर्तमान यूएफसी वेल्टरवेट चैंपियन और पूर्व यूएफसी लाइटवेट चैंपियन हैं । इस्लाम मखाचेव 5 फीट 10 इंच लंबे हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी इयान मचाडो गैरी की लंबाई 6 फीट 3 इंच है। यानी गैरी को लगभग पांच इंच की लंबाई का फायदा मिलता है। इसके अलावा उनके हाथों की पहुंच यानी रीच भी मखाचेव से करीब चार इंच ज्यादा है। गैरी का मानना है कि उनकी यही शारीरिक खूबियां इस मुकाबले में बड़ा अंतर पैदा कर सकती हैं। उनका विश्वास है कि वे अपनी लंबाई, रीच और स्ट्राइकिंग स्किल्स की मदद से मखाचेव को ऐसी चुनौती देंगे, जैसी उन्हें पहले बहुत कम फाइटर्स ने दी है।
अगर गैरी मुकाबले को स्ट्राइकिंग रेंज में बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो उनकी लंबाई और रीच काफी अहम साबित हो सकती है। आयरिश फाइटर अपनी तेज जैब, शानदार फुटवर्क और फ्रंट किक के लिए जाने जाते हैं। लंबा कद होने की वजह से वे सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए लगातार स्ट्राइक कर सकते हैं। इससे उन्हें पॉइंट्स हासिल करने का मौका मिलेगा और वे भारी हमलों के आदान-प्रदान से भी बच सकते हैं। मखाचेव जैसे अपेक्षाकृत कम लंबाई वाले फाइटर के खिलाफ यह रणनीति उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
हालांकि, केवल लंबाई और रीच के आधार पर इस्लाम मखाचेव को कमजोर नहीं आंका जा सकता। वे पहले भी ऐसे कई फाइटर्स को हरा चुके हैं, जिन्हें शारीरिक बढ़त हासिल थी। इसका सबसे बड़ा उदाहरण डैन हुकर के खिलाफ उनकी फाइट है। हुकर की लंबाई और रीच मखाचेव से ज्यादा थी, लेकिन मखाचेव ने तेजी से दूरी कम की और पहले ही राउंड में उन्हें सबमिशन से हरा दिया। इस मुकाबले ने साबित किया कि सिर्फ शारीरिक आकार किसी फाइट का नतीजा तय नहीं करता।
इस्लाम मखाचेव की सबसे बड़ी ताकत उनकी वर्ल्ड-क्लास रेसलिंग और ग्रैपलिंग है। वे लगातार टेकडाउन करने की क्षमता रखते हैं, जिससे विरोधी की स्ट्राइकिंग का फायदा काफी हद तक खत्म हो जाता है। उनकी कम लंबाई का एक फायदा यह भी है कि उनका सेंटर ऑफ ग्रेविटी नीचे रहता है। इससे टेकडाउन करना आसान होता है और क्लिंच के दौरान विरोधी पर बेहतर कंट्रोल बनाया जा सकता है। अगर मखाचेव इस फाइट में भी दूरी कम करने में सफल रहते हैं, तो गैरी की लंबाई और रीच का असर काफी कम हो सकता है।
प्रोफेशनल रिकॉर्ड के मामले में भी इस्लाम मखाचेव आगे दिखाई देते हैं। मखाचेव अब तक 29 प्रोफेशनल मुकाबले लड़ चुके हैं, जिनमें उन्होंने 28 जीत दर्ज की है और सिर्फ एक बार हार का सामना किया है। वहीं, इयान मचाडो गैरी ने 18 प्रोफेशनल फाइट्स लड़ी हैं। इनमें उन्होंने 17 मुकाबले जीते हैं, जबकि एक में उन्हें हार मिली है। यानी अनुभव के मामले में मखाचेव ने गैरी से 11 ज्यादा प्रोफेशनल फाइट्स लड़ी हैं। इसके अलावा उनके नाम कई चैंपियनशिप मुकाबलों का अनुभव भी है।
अगर फाइट खत्म करने की क्षमता की बात करें, तो आंकड़े गैरी के पक्ष में नजर आते हैं। उनकी लगभग 41 प्रतिशत जीत स्टॉपेज से आई हैं, जबकि मखाचेव के मामले में यह आंकड़ा करीब 18 प्रतिशत है। इससे साफ होता है कि सही मौका मिलने पर गैरी मुकाबले को समय से पहले खत्म करने की क्षमता रखते हैं।
इयान मचाडो गैरी को अपना पहला UFC टाइटल शॉट शानदार प्रदर्शन के बाद मिला है। उन्होंने कार्लोस प्राटेस और पूर्व वेल्टरवेट चैंपियन बेलाल मुहम्मद जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराकर खुद को डिवीजन के शीर्ष फाइटर्स में शामिल किया। वहीं, इस्लाम मखाचेव के लिए यह मुकाबला अपनी विरासत को और मजबूत करने का मौका है। लाइटवेट से वेल्टरवेट डिवीजन में आने के बाद उन्होंने जैक डेला मैडालेना को हराकर वेल्टरवेट बेल्ट अपने नाम की थी। अब वे पहली बार इस खिताब का बचाव करने उतरेंगे।
अगर इयान मचाडो गैरी मुकाबले को पूरे समय खड़े होकर लड़ने में सफल रहते हैं, तो उनकी लंबाई और रीच निश्चित रूप से उन्हें फायदा पहुंचा सकती है। लेकिन यदि इस्लाम मखाचेव जल्दी दूरी कम कर अपनी रेसलिंग और ग्रैपलिंग का इस्तेमाल करने लगे, तो गैरी का शारीरिक फायदा काफी हद तक बेअसर हो सकता है। यही वजह है कि UFC 330 की यह टाइटल फाइट केवल लंबाई और रीच की नहीं, बल्कि तकनीक, रणनीति और अनुभव की भी बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।