
Jharkhand Cricketers: झारखंड क्रिकेट की पहचान लंबे समय तक महेंद्र सिंह धोनी के नाम से जुड़ी रही है, लेकिन अब राज्य से निकल रही नई प्रतिभाएं इस तस्वीर को बदल रही हैं। इस सीजन दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की टीम में झारखंड के पांच खिलाड़ियों की मौजूदगी ने राज्य की बढ़ती क्रिकेट क्षमता को एक बार फिर सामने ला दिया है। खासतौर पर बल्लेबाजी में युवा खिलाड़ियों का प्रदर्शन चयनकर्ताओं का ध्यान खींच रहा है।
नई दिल्ली में दक्षिण जोन के खिलाफ दलीप ट्रॉफी फाइनल के दौरान पूर्व तमिलनाडु बल्लेबाज और राष्ट्रीय चयनकर्ता श्रीधरन शरथ ने झारखंड से निकल रही युवा प्रतिभाओं की तारीफ की। उन्होंने कहा कि झारखंड से कुछ बेहद अच्छे युवा क्रिकेटर सामने आ रहे हैं। ईस्ट जोन की टीम में झारखंड से कप्तान ईशान किशन, विराट सिंह, कुमार कुशाग्र, शिखर मोहन और अनुकूल रॉय शामिल हैं।
झारखंड राज्य क्रिकेट संघ के सचिव सौरभ तिवारी ने भी ईस्ट जोन में राज्य के पांच खिलाड़ियों के चयन को मौजूदा झारखंड क्रिकेट की सही तस्वीर बताया। उन्होंने कहा कि ये सभी खिलाड़ी टीम में जगह पाने के हकदार हैं। तिवारी ने खासतौर पर कुमार कुशाग्र की परिपक्वता और अनुकूल रॉय के प्रदर्शन की तारीफ की। रॉय ने नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 5 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की थी।
झारखंड के कप्तान और भारतीय विकेटकीपर ईशान किशन ने टीम की बल्लेबाजी सोच में बदलाव को अहम बताया। उनके मुताबिक, पहले कई बार बल्लेबाज 70-80 रन बनाने के बाद संतुष्ट हो जाते थे, जबकि मजबूत बल्लेबाज अपनी शुरुआत को शतक या बड़े स्कोर में बदलते थे। किशन का मानना है कि सेट होने के बाद बल्लेबाजों को पारी को और आगे ले जाने की मानसिकता विकसित करनी होगी।
21 वर्षीय कुमार कुशाग्र ने 2022 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया था। वह अब तक लाल गेंद के क्रिकेट में छह शतक और 2,000 से ज्यादा रन बना चुके हैं। वहीं शिखर मोहन ने 2025-26 सीजन में प्रथम श्रेणी पदार्पण किया और उनका औसत करीब 55 का रहा है, जिसमें दो शतक भी शामिल हैं।
कुशाग्र और मोहन सिर्फ प्रथम श्रेणी क्रिकेट तक सीमित नहीं हैं। पिछले सीजन झारखंड की पहली सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जीत में कुशाग्र ने 10 पारियों में 60.28 की औसत से 422 रन बनाए थे। सौरभ तिवारी के मुताबिक, दोनों खिलाड़ी अलग-अलग प्रारूपों में टीम के लिए उपयोगी योगदान दे रहे हैं और उनके 40-50 रन जैसे अहम स्कोर भी मैच का रुख बदल सकते हैं।
झारखंड के पूर्व खिलाड़ी और अंडर-23 कोच ईशान जग्गी के मुताबिक, राज्य में युवा खिलाड़ियों को अगले स्तर के लिए तैयार करने पर लगातार काम किया जा रहा है। इसके लिए अंडर-23 टीम को पुडुचेरी में अभ्यास मैच भी खिलाए जा रहे हैं, ताकि खिलाड़ियों को अलग-अलग मैच परिस्थितियों का अनुभव मिल सके।
जग्गी के अनुसार, ज्यादा मैच खेलने से युवा क्रिकेटरों को अलग-अलग परिस्थितियों से निपटने का अनुभव मिलता है। यही अनुभव आगे चलकर बड़ी पारियां खेलने की आदत विकसित करता है। उन्होंने जोर दिया कि लाल गेंद क्रिकेट में सफल होने के लिए लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि टेस्ट और प्रथम श्रेणी क्रिकेट की जरूरतें टी20 से बिल्कुल अलग होती हैं।
महेंद्र सिंह धोनी झारखंड क्रिकेट की सबसे बड़ी पहचान रहे हैं, लेकिन अब राज्य के कई युवा खिलाड़ी अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दलीप ट्रॉफी में पांच खिलाड़ियों की मौजूदगी और चयनकर्ताओं की नजर इस बात का संकेत है कि झारखंड क्रिकेट अब सिर्फ एक बड़े नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी भी राष्ट्रीय स्तर की दौड़ में अपनी जगह बनाने लगी है।