Bluetooth Technology: कैसे पड़ा ब्लूटूथ का नाम? 10वीं सदी के वाइकिंग राजा से जुड़ा है राज

Published : Oct 12, 2026, 01:20 PM IST
Bluetooth Technology

सार

वायरलेस तकनीक ब्लूटूथ का नाम 10वीं सदी के वाइकिंग राजा हेराल्ड 'ब्लूटूथ' गोर्मसन के नाम पर रखा गया है। उन्होंने डेनमार्क के कबीलों और नॉर्वे के कुछ हिस्सों को एकजुट किया था, जिससे प्रेरित होकर टेक क्रिएटर्स ने इसका नाम ब्लूटूथ रखा।

हेराल्ड 'ब्लूटूथ' गोर्मसन- ये 10वीं सदी के वो वाइकिंग राजा हैं, जिनके नाम पर आज की मॉडर्न वायरलेस टेक्नोलॉजी 'ब्लूटूथ' का नाम पड़ा। डेनमार्क और नॉर्वे के कुछ हिस्सों पर राज करने वाले इस स्कैंडिनेवियाई राजा ने डिजिटल युग को एक अनोखी प्रेरणा दी। उनका काम अलग-अलग कबीलों को जोड़ना था, और यही इस तकनीक का भी लक्ष्य था- अलग-अलग कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल को एक साथ लाना।

हेराल्ड गोर्मसन ने 958 ईस्वी के आसपास अपना शासन शुरू किया था। उन्होंने 986 ईस्वी तक राज किया। इस दौरान उन्होंने आपस में लड़ने वाले डेनिश कबीलों को एक साम्राज्य में मिला दिया। उनका निकनेम 'ब्लूटूथ' (पुरानी नॉर्स भाषा में Blåtand) था। कहा जाता है कि उनका एक दांत खराब होकर नीला या काला पड़ गया था, जिसकी वजह से उन्हें यह नाम मिला। कुछ लोग इसे उनके सांवले रंग से भी जोड़ते हैं।

सबको साथ लाने वाले राजा की कहानी

साल 958 ईस्वी। इसी समय हेराल्ड गोर्मसन ने अपने पिता 'गोर्म द ओल्ड' से सत्ता संभाली थी। उनके पिता डेनमार्क के पहले मान्यता प्राप्त राजा थे। हेराल्ड ने करीब 986 ईस्वी तक राज किया और राज्य को मजबूत बनाने में कई बड़ी कामयाबियां हासिल कीं।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि डेनमार्क के आपस में लड़ने वाले कबीलों को एक करना था। उन्होंने नॉर्वे के कुछ हिस्सों तक अपनी ताकत बढ़ाई। इसी दौर में उन्होंने ईसाई धर्म भी अपना लिया था। इस खास पल की याद में उन्होंने 'ग्रेट जेलिंग स्टोन' बनवाया था। उन्होंने ऐलान किया था कि "मैंने पूरा डेनमार्क और नॉर्वे जीत लिया है और डेनिश लोगों को ईसाई बना दिया है।" अलग-अलग इलाकों और संस्कृतियों को जोड़ने वाले उनके इसी काम ने उन्हें टेक वर्ल्ड के लिए एक परफेक्ट सिंबल बना दिया।

कैसे सामने आया यह नाम?

साल 1997। टेक लीडर्स की एक अहम मीटिंग में 'ब्लूटूथ' नाम पर मुहर लगी। इंटेल के इंजीनियर जिम कार्दच ने यह अनोखा नाम सुझाया था।

उस वक्त एरिक्सन, इंटेल और नोकिया जैसी कंपनियां एक शॉर्ट-रेंज वायरलेस स्टैंडर्ड पर काम कर रही थीं। उन्हें एक ऐसा तरीका चाहिए था जिससे मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे डिवाइस आपस में आसानी से कनेक्ट हो सकें। जिम कार्दच ने उस समय वाइकिंग्स पर एक नॉवेल पढ़ी थी। उन्हें राजा हेराल्ड के इतिहास और अपने प्रोजेक्ट के लक्ष्य में काफी समानता दिखी। उन्होंने इसकी वजह भी बताई:

"राजा हेराल्ड ब्लूटूथ स्कैंडिनेविया को एकजुट करने के लिए मशहूर थे। ठीक उसी तरह, हम भी एक शॉर्ट-रेंज वायरलेस लिंक के जरिए पीसी और सेलुलर इंडस्ट्री को एक साथ लाना चाहते थे।"

टेंपरेरी कोडनेम से ग्लोबल स्टैंडर्ड तक का सफर

शुरुआत में ब्लूटूथ सिर्फ एक कोडनेम था। एरिक्सन, इंटेल और नोकिया के डेवलपर्स इसे एक टेंपरेरी नाम की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। वे रेडियोवायर (RadioWire) और पैन (PAN - पर्सनल एरिया नेटवर्किंग) जैसे दूसरे नामों पर भी विचार कर रहे थे।

इस 'शॉर्ट-लिंक रेडियो टेक्नोलॉजी' प्रोजेक्ट को एक पक्के नाम की जरूरत थी। टीम इसकी तलाश में जुटी थी। लेकिन जैसे-जैसे काम आगे बढ़ा और तकनीक बाजार में लॉन्च होने के करीब पहुंची, 'ब्लूटूथ' नाम टीम के बीच काफी पॉपुलर हो गया।

फिर एक ऑफिशियल नाम चुनने का वक्त आया। ट्रेडमार्क रिसर्च में पता चला कि 'रेडियोवायर' और 'पैन' जैसे नामों के साथ दिक्कतें हैं। या तो वे पहले से इस्तेमाल हो रहे थे या उनमें कुछ कानूनी पेंच थे। इन अड़चनों के बीच, कंसोर्टियम (जिसमें अब आईबीएम और तोशिबा भी शामिल हो चुके थे) को यह कोडनेम पहले ही पसंद आ चुका था। इसलिए 'ब्लूटूथ' को ही ऑफिशियल नाम चुन लिया गया। इसकी ऐतिहासिक कहानी और याद रहने वाले नाम की वजह से 1999 में इसे आधिकारिक तौर पर अपना लिया गया।

ब्लूटूथ का आइकॉनिक लोगो

अब बात करते हैं इसके लोगो की। इसका डिजाइन भी वाइकिंग राजा को ही ट्रिब्यूट देता है। यह एक 'बाइंड रून' (bind rune) है, जो प्राचीन नॉर्स और जर्मनिक परंपरा का हिस्सा है।

इस परंपरा में दो या उससे ज्यादा अक्षरों (runes) को मिलाकर एक सिंबल बनाया जाता है। ब्लूटूथ के लोगो में हेराल्ड के नाम के शुरुआती अक्षरों को मिलाया गया है। इसमें H (ᚼ) का मतलब हैगल (Hagall - यानी ओले या तूफान) और B (ᛒ) का मतलब बजारकन (Bjarkan - यानी बर्च का पेड़) है। प्राचीन लिपि के इस शानदार कॉम्बिनेशन ने ब्लूटूथ को उसकी खास पहचान दी। यह राजा हेराल्ड 'ब्लूटूथ' गोर्मसन के साथ इसके गहरे कनेक्शन को दिखाता है।

हेराल्ड ब्लूटूथ ने एक हजार साल पहले कई राज्यों को एकजुट किया था। आज, उनके नाम की यह तकनीक अरबों डिवाइस को आपस में जोड़ रही है। स्मार्टफोन से लेकर इंडस्ट्रियल सेंसर तक, हर वायरलेस कनेक्शन में उनकी कहानी झलकती है। एक वाइकिंग राजा की यह विरासत आज भी इनोवेशन को आगे बढ़ा रही है।

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