
बिजनेस डेस्क। कोरोना वायरस की महामारी फैलने के बाद से अमेरिका लगातार चीन पर सख्ती बना रहा है। अब उसने चीन की दिग्गज टेलिकॉम कंपनी हुवावे के खिलाफ कार्रवाई की है। इसके तहत भारतीय सब्सिडियरी 'हुवावे इंडिया' और सभी तरह की दूसरी विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया।
हुवावे इंडिया को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का टूल बताया। प्रतिबंध लगाते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा, "यह कंपनी (हुवावे इंडिया) भरोसा करने लायक नहीं है। यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का एक टूल है।" अमेरिका ने यह आरोप भी लगाया कि इस कंपनी के जरिए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अपने हितों को साधती है। इससे पहले अमेरिकी प्रसासन ने 2019 में हुवावे पर बैन लगाकर उसे एंटिटी लिस्ट में शामिल कर दिया था।
एंटीटी लिस्ट से क्या होगा असर?
अमेरिका ने कई विदेशी कंपनियों की एंटिटी लिस्ट जारी की है। एंटिटी लिस्ट का मकसद यह होता है कि इसमें शामिल कंपनियां अमेरिका में कारोबार न कर पाएं। हुवावे चीन की मशहूर टेलीकॉम कंपनी है।
हुवावे पर क्या है अमेरिकी सरकार के आरोप
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के फेडरल रजिस्टर ने जो नोटिफिकेशन जारी किया है उसमें हुवावे और उसकी सहयोगी कंपनियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। कंपनियों की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी नीति पर खतरे की बात करते हुए आरोप लगाया है कि हुवावे, अमेरिका की टेक्नोलॉजी को चोरी करता रहा है।
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