
जरूरत पड़ने पर हम अक्सर अपना फ़ोन नंबर दे देते हैं, खासकर वह नंबर जो हमारे बैंक और UPI अकाउंट से जुड़ा होता है। लेकिन पुणे सप्लाई ऑफिस का कहना है कि मॉल और रेस्टोरेंट में फ़ोन नंबर देना सुरक्षित नहीं है। SMS और भ्रामक कॉल के जरिए धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। इसी वजह से यह चेतावनी जारी की गई है। कई संस्थानों से अपराधियों द्वारा नंबर आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं। जिला सप्लाई ऑफिस द्वारा जारी चेतावनी में कहा गया है कि व्यक्ति की सहमति के बिना उसका नंबर शेयर करना एक तरह का क्राइम है।
ग्राहकों के मोबाइल नंबर उनकी जानकारी के बिना थर्ड पार्टी के साथ शेयर करने वाले संस्थानों के खिलाफ IT एक्ट 2000 के तहत आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। इसके तहत तीन साल तक की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, रिटेल स्टोर सहित अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठान ग्राहकों के मोबाइल नंबर का बैंक बनाते हैं। साइबर फ्राड करने वाले कस्टमर को ठगने के लिए लगातार नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। साइबर धोखाधड़ी के कुछ प्रमुख तरीके जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए, वे इस प्रकार हैं:
फ़िशिंग: व्यक्तिगत जानकारी उजागर करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक घोटाला है। स्मिशिंग: फ़िशिंग जैसा ही एक तरीका, लेकिन इसमें ईमेल के बजाय टेक्स्ट संदेशों का उपयोग किया जाता है। विशिंग: एक वॉयस फ़िशिंग हमला जिसमें स्कैमर वैध व्यवसायों या सरकारी एजेंसियों के रूप में पेश आते हैं ताकि फ़ोन पर बातचीत के जरिए संवेदनशील जानकारी निकाली जा सके। सिम स्वैपिंग: आपके मोबाइल कैरियर को आपके फ़ोन नंबर को एक नए सिम कार्ड में ट्रांसफर करने के लिए मनाना, जो उनके नियंत्रण में होता है, जिससे उन्हें आपके ऑनलाइन खातों तक पहुंच मिल जाती है।
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