
कोविड के बहाने अब छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में भी स्मार्टफोन आ गया है। पेट भरने के लिए रोटी न सही, पर हाथ में मोबाइल ज़रूर होना चाहिए, ऐसी स्थिति हो गई है। कई बच्चे मोबाइल न मिलने पर जान दे देते हैं, तो दूसरी ओर मोबाइल देखकर अपराध करने वाले या हद से ज़्यादा यौन-उत्तेजना महसूस करने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है, ऐसा कई अध्ययनों में बताया गया है। बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर कई तरह की परेशानियों में फंस रहे हैं। इसीलिए केंद्र सरकार ने इस पर रोक लगाने का फैसला किया है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून का ड्राफ्ट तैयार किया गया है, और अगर यह पास हो जाता है, तो जल्द ही बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बंद हो जाएंगे।
इस नियम के अनुसार, 18 साल से कम उम्र के बच्चे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। अगर ऐसा करना ज़रूरी हो, तो माता-पिता या किसी बड़े की अनुमति लेनी होगी। जब बच्चे ऑनलाइन अकाउंट खोलेंगे, तो एक बॉक्स खुलेगा। वहां माता-पिता को अपना पासवर्ड डालकर अनुमति देनी होगी, तभी अकाउंट खुलेगा। अगर माता-पिता का कोई सोशल मीडिया अकाउंट है, तो उससे लॉगिन करके भी बच्चों को अनुमति दे सकते हैं। अगर माता-पिता का कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है, तो उन्हें आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड जैसा कोई पहचान पत्र अपलोड करके अनुमति देनी होगी।
आजकल के बच्चे बहुत शातिर होते हैं। इसलिए सोशल मीडिया अकाउंट खोलते समय वे अपनी उम्र ज़्यादा बता सकते हैं। लेकिन इस पर भी रोक लगेगी। अभी इस ड्राफ्ट में इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया कंपनियों को नियम बनाने के लिए कहा गया है। अगर उम्र या माता-पिता के बारे में कोई गलत जानकारी दी जाती है, तो बच्चों को कानूनी परेशानी हो सकती है। कई सालों तक वे कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं खोल पाएंगे, ऐसा इस ड्राफ्ट में बताया गया है। गलत कमेंट करना, फर्जी आईडी से गाली देना, अपमान करना, ऐसे अकाउंट पर भी सरकार की नज़र है, और जल्द ही इनके लिए भी नियम बनाए जाएंगे।
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