Privacy Policy: क्या भारत छोड़ देगा वॉट्सऐप? प्राइवेसी विवाद में अब क्या होगा आगे?

Published : Feb 04, 2026, 12:40 PM IST
Privacy Policy: क्या भारत छोड़ देगा वॉट्सऐप? प्राइवेसी विवाद में अब क्या होगा आगे?

सार

'अगर भारतीय संविधान के हिसाब से बने कानूनों का पालन नहीं कर सकते, तो देश छोड़कर जा सकते हैं'... सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी वॉट्सऐप और मेटा से सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यही कहा है।

नई दिल्ली: भारत में डिजिटल ज़िंदगी का एक ज़रूरी हिस्सा बन चुका इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप अब एक बड़े विवाद में फंस गया है। परिवार की बातचीत से लेकर ऑफ़िशियल जानकारी और बिज़नेस के लेन-देन तक के लिए इस्तेमाल होने वाले वॉट्सऐप के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के सख़्त रुख़ पर अब चर्चा हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस की यह टिप्पणी कि अगर वॉट्सऐप भारतीय संविधान का पालन नहीं कर सकता तो वह भारत छोड़ सकता है, अब काफ़ी ध्यान खींच रही है।

कोर्ट ने क्या कहा…

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए जुर्माने के एक मामले में अपील पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप और उसकी पेरेंट कंपनी मेटा को साफ़ चेतावनी दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी कंपनी देश के नागरिकों के निजता के अधिकारों में दखल नहीं दे सकती। कोर्ट ने यहाँ तक कहा कि अगर वे निजता के अधिकारों का पालन करने में नाकाम रहते हैं, तो उनके पास भारत छोड़ने का विकल्प है।

समस्याओं की शुरुआत ऐसे हुई

2021 में वॉट्सऐप द्वारा लाई गई प्राइवेसी पॉलिसी ने ही इन विवादों को जन्म दिया। इसमें यह शर्त थी कि यूज़र का डेटा मेटा की दूसरी कंपनियों के साथ शेयर किया जा सकता है, जो चिंता का कारण बनी। यूज़र्स के पास सिर्फ़ यही रास्ता था कि या तो वे इस पॉलिसी को मानें या अपना अकाउंट डिलीट कर दें। यानी, कंपनी ने डेटा शेयरिंग से बाहर निकलने का कोई साफ़ मौका नहीं दिया। वॉट्सऐप का कहना है कि दोस्तों और परिवार के बीच की चैट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित हैं। लेकिन बिज़नेस अकाउंट्स के साथ शेयर की गई जानकारी का इस्तेमाल विज्ञापनों के लिए किया जा सकता है, इस बात ने चिंताएँ बढ़ा दीं।

इस मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने वॉट्सऐप पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इसी के ख़िलाफ़ अपील पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में पहुँची थी। इस अपील पर बहस के दौरान ही कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि अगर संविधान का पालन नहीं कर सकते, तो वॉट्सऐप भारत छोड़ सकता है।

सुनवाई के दौरान, चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने काफ़ी सख़्त रुख़ अपनाया। कोर्ट ने पूछा कि जब यूज़र्स के पास "या तो इसे मानो या छोड़ दो" वाली स्थिति हो, तो सहमति असली कैसे हो सकती है? जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि वॉट्सऐप की सहमति 'बनावटी सहमति' है। कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि यहाँ यूज़र्स के पास कोई असली विकल्प नहीं है।

क्या वॉट्सऐप भारत छोड़ देगा?

सुप्रीम कोर्ट ने मेटा को 9 फरवरी तक एक हलफ़नामा देने का निर्देश दिया है, जिसमें यह गारंटी हो कि यूज़र डेटा शेयर नहीं किया जाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो अपील ख़ारिज हो सकती है। हालाँकि वॉट्सऐप के भारत छोड़ने की संभावना कम है, लेकिन कोर्ट का साफ़ संदेश है कि कंपनी को भारतीय संविधान और निजता के अधिकारों के हिसाब से ही काम करना होगा। यह मामला यूज़र की प्राइवेसी को प्राथमिकता देने वाला एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।

PREV

नई तकनीक, AI अपडेट्स, साइबर सुरक्षा, स्मार्टफोन लॉन्च और डिजिटल नवाचारों की आसान और स्पष्ट रिपोर्टिंग पाएं। ट्रेंडिंग इंटरनेट टूल्स, ऐप फीचर्स और गैजेट रिव्यू समझने के लिए Technology News in Hindi सेक्शन पढ़ें। टेक दुनिया की हर बड़ी खबर तेज़ और सही — केवल Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

Cupboard Sliding Almirah for Room: आराम+स्टाइल, बेडरूम के लिए अलमारी स्लाइड डोर डिजाइन
Fast Charging: क्या स्पीड बढ़ने से बैटरी लाइफ घटती है? जानें ये टिप्स