
वर्ल्ड न्यूज. सरीसृपों(reptiles) की दुनिया में पूंछ(tail) का आकार बड़ा मायने रखता है। कुछ प्रजातियां अपने संतुलन के लिए लंबी पूंछ का उपयोग करती हैं। उदाहरण के तौर पर जैसे एशियाई घास छिपकली(Asian grass lizard) और हरा गिरगिट(green basilisk), जबकि समुद्री सरीसृप संचालन और गतिशीलता(propulsion and maneuverability) के लिए अपनी पूंछ का उपयोग करते हैं। चीनी वैज्ञानिकों ने मई के शुरुआत में युन्नान प्रांत(Yunnan province) से 244 मिलियन वर्ष पहले पाई जाने वाली छिपकली खोजी है। इसे सरीसृपों(reptiles) के परिवार का चीन मे सबसे पुराना जीवाश्म रिकार्ड(China's oldest fossil record) माना जा रहा है। माना जा रहा है कि लगभग 244 मिलियन वर्ष पहले ट्राइसिक काल(Triassic period) के दौरान प्राचीन समुद्र में घूमता था।
आधे शरीर के बराबर पूंछ
इस प्रागैतिहासिक प्राणी(The prehistoric creature) का नाम होंगहेसॉरस लॉन्गिकाउडालिस( Honghesaurus longicaudalis) था और इसमें किसी भी ज्ञात पचीप्लुरोसॉरस की सबसे लंबी पूंछ थी। यह सरीसृपों के इस परिवार का चीन का सबसे पुराना जीवाश्म रिकॉर्ड भी है। पचीप्लुरोसॉरस छोटे से मध्यम आकार के छिपकली जैसे समुद्री सरीसृपों का एक समूह है, जो प्रारंभिक से मध्य ट्राइसिक तक पाए जाते थे। बहरहाल, यह जीवाश्म 47.1 सेंटीमीटर लंबा है और इसकी पूंछ उसके शरीर की लंबाई के आधे से अधिक 25.4 सेंटीमीटर तक फैली हुई है। इस सरीसृप की पूंछ में 69 कशेरुक(vertebrae) हैं, जो किसी भी अन्य ज्ञात पचीप्लेउरोसॉर की तुलना में कहीं अधिक है। आमतौर पर ये 58 से अधिक नहीं होते हैं। इसकी तुलना में मनुष्यों में केवल 33 कशेरुक होते हैं।
पानी में तैरने और संचालन के लिए अनुकूल है पूंछ
जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स (journal Scientific Reports) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों का मानना है कि लंबी पूंछ के साथ इसका लंबा शरीर इसे पानी में अच्छी ऊर्जा दक्षता और गतिशीलता प्रदान कर सकता था, जिससे यह एक उत्कृष्ट तैराक बन जाता था। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज में इंस्टीट्यूट ऑफ वर्टेब्रेट पेलियोन्टोलॉजी एंड पैलियोएंथ्रोपोलॉजी के एक शोधकर्ता जू गुआंगहुई ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार यह जीवाश्म देखा, तो उन्हें बताया गया कि यह वुमेनगोसॉरस नामक एक और पहले से खोजा गया सरीसृप हो सकता है। लेकिन जू को यकीन नहीं हुआ और उसने जांच करने का फैसला किया। इसने उन्हें यह पता लगाने के लिए प्रेरित किया कि ये जीवाश्म वास्तव में पचीप्लुरोसॉर की दो प्रजातियों के बीच एक विकासवादी संक्रमण के चलते जन्मा होगा। यानी कियानक्सिसॉरस और वुमेनगोसॉरस के बीच का जानवर।
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