
नई दिल्ली. कोरोना में बीमारी का कारण बनने वाला SARS-CoV-2 के N440K वैरिएंट नया नहीं है और अब ये धीरे-धीरे कम हो रहा है। सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) ने इस बात की जानकारी दी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि कोरोना की दूसरी लहर में N440K वैरियंट ही बीमारियों का जिम्मेदार है। ये पिछले साल दक्षिण भारत में पाया गया था।
सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी ने कहा, कोरोना वायरस वैरिएंट N440K पर कई रिपोर्ट पब्लिश हुई है, जिसमें कहा गया है कि ये म्यूटेंट नया नहीं है। हम इसे पिछले साल से दक्षिण भारत में देख रहे हैं।
अब कम हो रहा है N440K वैरियंट
रिसर्च में ये भी कहा गया है कि ये वैरियंट अब कम हो रहा है। ये जल्द ही खत्म होगा। CCMB के एक वैज्ञानिक दिव्या तेज सोपती ने एक ट्वीट में कहा, ये वैरियंट कम हो रहा है और जल्द ही इसके गायब होने की संभावना है। दिव्या तेज सोवती ने कहा कि N440K दक्षिण भारत में पहली लहर के दौरान और बाद में चिंता का विषय था।
ये बताना मुश्किल, दुनिया में कितने वैरियंट
CCMB के शोधकर्ता ने कहा कि N440K वैरिएंट विशाखापत्तनम और आंध्र प्रदेश में बहुत कम था। देश के अधिकांश हिस्सों में बी 1617 का वैरियंट अब हावी हो रहा है। आगे बताते हुए, सोवती ने कहा कि यह बताना मुश्किल है कि दुनिया में अब कितने वैरियंट मौजूद हैं क्योंकि हर बार यह बदल जाते हैं। कुछ वैरिएंट दूसरों की तुलना में अधिक संक्रामक हैं, लेकिन यह नहीं बताया जा सकता है कि सबसे अधिक खतरनाक कौन सा है। महाराष्ट्र के आंकड़ों से पता चलता है कि B1617 में वृद्धि मार्च 2021 की तुलना में फरवरी में देखी गई थी और N440K में कमी आई थी। CCMB, ने कहा कि मुख्य फोकस कोरोना वायरस के प्रसार को कम करने पर होना चाहिए।
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