पाकिस्तान ही समझ लो...दिल्ली के इस एरिया में महिला ने दी यूट्यबर को धमकी, कैमरा बंद कराया, वायरल हुआ वीडियो

Published : Mar 06, 2025, 10:22 PM ISTUpdated : Mar 06, 2025, 10:32 PM IST
rohingyas

सार

दिल्ली के कालिंदी कुंज (Kalindi Kunj) में बांग्लादेशी रोहिंग्या (Bangladeshi Rohingya) पर रिपोर्टिंग कर रहे एक पत्रकार (Journalist) के साथ महिला ने की बदसलूकी। जानिए क्या है पूरा मामला। 

Viral video on reporting Bangladeshi Rohingyas: दिल्ली के कालिंदी कुंज (Kalindi Kunj) इलाके में बांग्लादेशी रोहिंग्या (Bangladeshi Rohingya) शरणार्थियों पर रिपोर्टिंग कर रहे एक यूट्यूबर को एक महिला द्वारा अपमानित (Heckled) किए जाने का मामला सामने आया है। महिला द्वारा कैमरा बंद कराए जाने पर जब रिपोर्टर ने पूछा कि यह पाकिस्तान थोड़े न है तो महिला ने कहा-पाकिस्तान ही समझ लो। कहासुनी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

 

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूथ मीडिया टीवी के पत्रकार दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में रोहिंग्या शरणार्थियों की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार कर रहे थे, तभी एक महिला ने उन पर आपत्ति जताई और उनके साथ बदसलूकी शुरू कर दी। दरअसल, वह पत्रकार वहां रह रहे लोगों से पूछ रहा था कि वे लोग कितने दिनों से एरिया में रह रहे हैं। एक लोकल ने बताया कि वह लोग बांग्लादेश से आए हैं। उसी समय एक महिला आई और उससे भिड़ गई। महिला ने पत्रकार से कैमरा बंद करने को कहा। जब पत्रकार ने कैमरा बंद करने से इनकार किया तो उसने पूछा कि सरकारी है?

काफी विवादित बहस के दौरान रिपोर्ट ने महिला से पूछा कि वह क्यों कैमरा बंद करने को कह रही है, क्या यह पाकिस्तान है? इस पर उसने जवाब दिया कि पाकिस्तान ही समझ लो। उसने कहा कि आप कहीं जाकर शूट करो, जहां पर लोकतंत्र हो।

काफी संख्या में रोहिंग्या रहते हैं कालिंदी कुंज में...

एक रिपोर्ट के अनुसार, काफी संख्या में रोहिंग्या दिल्ली के कालिंदी कुंजह में रहते हैं। इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने एक एनजीओ से पूछा था कि दिल्ली में रोहिंग्यास कहां रह रहे हैं और उनको क्या-क्या सुविधा मुहैया कराया गया है। एक एनजीओ रोहिंग्या मानवाधिकार पहल की ओर से एफिडेविट दायर किया गया था। एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वे एनजीओ की ओर से जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच के सामने अपना पक्ष रखे थे। उन्होंने कहा था कि रोहिंग्या शरणार्थियों को सरकारी स्कूल और हास्पिटल्स में दाखिला नहीं मिल रहा क्योंकि उनके पास आधार नहीं है। लेकिन आधार केवल भारतीय नागरिकों को मिलता है। उनके पास यूएन का रिफ्यूजी कार्ड है। इसके आधार पर उनको यह सुविधा मिलनी चाहिए।

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